अथर्ववेद से संदेश-जो अहंकारी को परास्त करे वही इन्द्र समान राजा


         सभी मनुष्य को अपने लिये नियत तथा स्वाभाव के अनुकूल कार्य करना चाहिए। इतना ही नहीं अगर सार्वजनिक हित के लिये कोई कार्य आवश्यक करने की अपने अंदर क्षमता लगे तो उसमें भी प्राणप्रण से जुट जाना चाहिए। अगर हम इतिहास और धर्म पुस्तकों पर दृष्टिपात करें तो सामान्य लोग तो अपना जीवन स्वयं और परिवार के लिये व्यय कर देते हैं पर जो ज्ञानी, त्यागी और सच्चे भक्त हैं पर सार्वजनिक हित के कार्य न केवल प्रारंभ करते हैं बल्कि समय आने पर बड़े बड़े अभियानों का नेतृत्व कर समाज को सम्मान और परिवर्तन की राह पर ले जाते हैं। ऐसे लोग न केवल इतिहास में अपना नाम दर्ज करते हैं वरन् अपने भग्वत्स्वरूप हो जाते हैं।
भारतीय अध्यात्म ग्रंथ अथर्ववेद में कहा गया है कि
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यः शर्धते नानुददाति शुध्यां दस्योर्हन्ता स जनास इन्द्रः।
‘‘जो मनुष्य अहंकारी के अहंकार को दमन करता है और जो दस्युओं को मारता है वही इन्द्र है।’’
यो जाभ्या अमेथ्यस्तधत्सखायं दुधूर्षति।
ज्योष्ठो पदप्रचेतास्तदाहु रद्यतिगति।
‘‘जो मनुष्य दूसरी स्त्री को गिराता है, जो मित्र की हानि पहुंचाता है जो वरिष्ठ होकर भी अज्ञानी है उसको पतित कहते हैं।’’

       एक बात निश्चित है कि जैसा आदमी अपना संकल्प धारण करता है उतनी ही उसकी देह और और मन में शक्ति का निर्माण होता है। जब कोई आदमी केवल अपने परिवार तथा स्वयं के पालन पोषण तक ही अपने जीवन का ध्येय रखता है तब उसकी क्षमता सीमित रह जाती है पर जब आदमी सामूहिक हित में चिंत्तन करता है तब उसकी शक्ति का विस्तार भी होता है। शक्तिशाली व्यक्ति वह है जो दूसरे के अहंकार को सहन न कर उसकी उपेक्षा करने के साथ दमन भी करता है। समाज को कष्ट देने वालों का दंडित कर व्यवस्था कायम करता है। ऐसी मनुष्य स्वयं ही देवराज इंद्र की तरह है जो समाज के लिये काम करता है। शक्तिशाली मनुष्य होने का प्रमाण यही है कि आप दूसरे की रक्षा किस हद तक कर सकते हैं।

संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
athor and editor-Deepak Raj Kukreja “Bharatdeep”,Gwalior
http://zeedipak.blogspot.com
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प्रथ्वी पर विचरते हैं तीन हीरे-हिन्दी धार्मिक चित्तन (prathvi ke teen heere-hindi dharmik chittan)


           आधुनिक प्रचार माध्यमों के विज्ञापनों से पूरा भारतीय समाज दिग्भ्रमित हो रहा है। क्रिकेट खिलाड़ियों, फिल्म अभिनेता तथा अभिनेत्रियों के अभिनीत विज्ञापन उपभोग की ऐसी खतरनाक प्रवृत्ति को जाग्रत करते हैं कि लोगों की अध्यात्मिक चेतना लुप्त हो गयी है। फिर हमारी शिक्षा व्यवस्था में ऐसी प्रणाली अपनाई गयी है जो केवल गुलाम बनाती है। ऐसे में अगर किसी में रचनात्मक प्रवृत्ति जाग्रत हो जाये तो वह पूर्व जन्म का ही प्रभाव समझे तो अच्छा है वरना तो अब व्यक्ति में चरित्र निर्माण की बजाय उसे प्रयोक्ता और सेवक बनने के लिये प्रेरित किया जा रहा है।

          वैसे समाज की हालत तो कोई पहले भी अच्छी नहीं थी। सोना, चांदी, हीरा और रत्नों की चाहत हमारे समाज में हमेशा रही है। शायद यही कारण है कि हमारे मनीषी मनुष्य के अंदर मौजूद उस रत्न का परिचय कराते रहे हैं जिसे आत्मा कहा जाता है। इसके बावजूद लोग भौतिक संसार की चकाचौंध में खो जाते हैं और सोना, चांदी और हीरे की चाहत में ऐसे दौड़ते हैं कि पूरा जीवन ही अध्यात्मिक ज्ञान के बिना गुजार देते हैं। जिस अन्न और जल से जीवन मिलता है उसे तुच्छ समझते हैं एक पल का चैन न दे वही सोना गले लगा देते हैं। उसी तरह देहाभिमान से युक्त होने के कारण अधिक वाचाल होकर क्रूरतम शब्दों का प्रयोग करते हैं। जिससे समाज में वैमनस्य बढ़ता है।
         महान नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि
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         पृथिव्यां त्रीणी रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
मूर्खे पाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।
        ‘‘इस प्रथ्वी पर तीन ही रत्न हैं-अन्न, जल और मधुर वाणी, किन्तु मूर्ख लोग पत्थर के टुकड़ों को ही रत्न कहते हैं।’’

                  अक्सर लोग कहते हैं कि भारतीय लोगों के पास दुनियां के अन्य देशों के मुकाबले बहुत अधिक सोना है, मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि उससे अधिक तो हम पर परमात्मा की यह कृपा है कि दुनियां के अन्य देशों से अधिक हमारे यहां भूगर्भ जलस्तर है। वैसे आजकल बाज़ार के सौदागर यह प्रयास भी कर रहे हैं कि यहां जल सूख जाये और उसे बेचकर अपने बैंक खाते बढ़ायें। अनेक तरह के ठंडे पेयों के कारखाने यहां स्थापित हो गये हैं जो अपने इलाके का पूरा जल पी जाते हैं। वहां का जलस्तर कम हो गया है पर भारतीय जनमानस ऐसी चकाचौंध में खो गया है कि उसे इसका आभास ही नहीं होता। जल जैसा रत्न हम खोते जा रहे हैं पर आर्थिक विकास का मोह ऐसा अंधा किये जा रहा है कि उसकी परवाह नहीं है।
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संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 
athor and editor-Deepak Raj Kukreja “Bharatdeep”,Gwalior
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