सच्ची मोहब्बत-हिन्दी शायरी (sachchi mohbbat-hindi shayari)


मोहब्बत और मोहब्बत में
फर्क होता है,
एक ढलती उम्र के साथ कम हो जाती है
दूसरी मतलब निकलते ही खत्म हो जाती है।
जिसमें रिश्ते निभाने की न मजबूरी हो,
ऐसी उम्मीद न की जायें, जो न पूरी हों,
दिल का सौदा दिल से हो तो भी पाक नहीं हो जाता,
जिस्मानी लगाव मतलब से बाहर नहीं आ पाता,
रूह में बस जाये जिसके लिये
बिना मतलब की हमदर्दी
वही सच्ची मोहब्बत कहलाती है।
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कवि, लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
यह कविता/आलेख रचना इस ब्लाग ‘हिन्द केसरी पत्रिका’ प्रकाशित है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन की अनुमति लेना आवश्यक है।
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1.दीपक भारतदीप की हिन्दी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप की अनंत शब्दयोग पत्रिका
3.दीपक भारतदीप का  चिंतन
4.दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका
5.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान का पत्रिका

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