क्षणिकाएँ और शायरी

कुछ उन्होने कहा नहीं
हमने कुछ सुना नहीं
फिर भी शोर बहुत था
उस जगह
जहाँ सजा था हाल
दुनिया भर के खास इसानों से
हम खुद ही निकल पड़े
हम आदमी थे बस यही थी एक वजह
———————————————

Leave a response

Your response: