Archive for the ‘jagran’ Category
विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)
Posted by: दीपक भारतदीप on November 29, 2009
हिंदी आध्यात्मिक सन्देश-बेकार के कम न करें तो ही ठीक (vidur niti-bekar kam n karen)
Posted by: दीपक भारतदीप on November 7, 2009
कौटिल्य दर्शन-दोस्त और दुश्मन दो प्रकार के होते हैं (kautilya darshan-dost aur dushman)
Posted by: दीपक भारतदीप on October 31, 2009
कौटिल्य का अर्थशास्त्र-कार्य के तीन व्यसन (kautilya ka arthshastra-karya ke teen vyasan)
Posted by: दीपक भारतदीप on September 20, 2009
कबीर वाणी-प्यार को सही ढंग से कोई नहीं समझता(kabir vani-pyar ka gyan)
Posted by: दीपक भारतदीप on September 12, 2009
चाणक्य नीति-प्रतिकार प्रतिहिंसा और प्रतिकार के भाव में दोष नहीं (chankya niti-time to time, life style)
Posted by: दीपक भारतदीप on September 9, 2009
वैचारिक महाभारत की आवश्यकता-आलेख (baba shri ramdev,shri shri ravishankar & shri gita)
Posted by: दीपक भारतदीप on August 21, 2009
विदुर नीति-अमीर रिश्तेदार के पास जाकर बेकार में दुःख पाना (vidur niti-amir ke pas jana)
Posted by: दीपक भारतदीप on August 8, 2009
कौटिल्य का अर्थशास्त्र-कार्य के होते हैं तीन व्यसन (kautilya ka arthshastra in hindi)
Posted by: दीपक भारतदीप on August 2, 2009
संत कबीर के-रात के सपने निराशा का भाव पैदा करते हैं (sant kabir-rat ke sapne aur nirasha)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 31, 2009
मनु स्मृति-गोद में रखकर भोजन करना ठीक नहीं (bhojan karne ka tarika-manu smruti)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 27, 2009
भर्तृहरि शतक-मनुष्य के लिए में स्वाभिमान जरूरी (jivan men svabhiman jaroori-hindi sandesh
Posted by: दीपक भारतदीप on July 21, 2009
विदुर नीति-बुद्धिमान से बैर करना ठीक नहीं (buddhiman se bair-vidur niti)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 19, 2009
रहीम क दोहे- दिल लगाकर कम करें कामयाबी तय करें (rahim ke dohe)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 9, 2009
रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 4, 2009
स्त्रियों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on June 27, 2009
भर्तृहरि नीति शतक: भक्ति को धंधा न समझें
Posted by: दीपक भारतदीप on June 25, 2009
चाणक्य नीति-निंदा का दुर्गुण हो तो अन्य पाप की क्या जरूरत
Posted by: दीपक भारतदीप on June 22, 2009
कौटिल्य का अर्थशास्त्र-शत्रु पर सिंह की तरह प्रहार करें
Posted by: दीपक भारतदीप on June 20, 2009
चाणक्य नीति-जो विद्या काम की न आये उसे पाना व्यर्थ
Posted by: दीपक भारतदीप on June 2, 2009
श्री गुरुवाणी-सत्संग से विचार निर्मल होते हैं
Posted by: दीपक भारतदीप on May 28, 2009
विदुर नीति-दुष्ट को अपना राज बताना खतरनाक
Posted by: दीपक भारतदीप on May 24, 2009
रहीम दास के दोहे-बुराई का नतीजा सामने जरूर आता है
Posted by: दीपक भारतदीप on May 22, 2009
संत कबीर वाणी:मिल बाँट कर खाएं वही हैं वीर
Posted by: दीपक भारतदीप on May 20, 2009
संत कबीर वाणीः अच्छा खाने को मिले तो भी बेवकूफ की संगत न करें
Posted by: दीपक भारतदीप on May 12, 2009
भर्तृहरि नीति शतक-भगवान ने दिया है मौन रहने का गुण
Posted by: दीपक भारतदीप on May 9, 2009
भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता
Posted by: दीपक भारतदीप on May 8, 2009
भर्तृहरि शतकः हंसों का मूल गुण परमात्मा भी नहीं छीन सकता
Posted by: दीपक भारतदीप on May 7, 2009
रहीम दास के दोहे: पशु अपना हित करने वाला गुड़ कभी नहीं खाते
Posted by: दीपक भारतदीप on May 3, 2009
भर्तृहरि नीति शतक: जिनकी देह,मन और विचार में अमृत हो ऐसे लोग नगण्य
Posted by: दीपक भारतदीप on May 2, 2009