Archive for the ‘Enternment’ Category
25
Dec
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, friends, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, jagran, mastram, media, web dunia, अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्त राम, मस्तराम, शब्द, सन्देश, हिन्दी. Tagged: कला, मनोरंजन, मस्ती, शायरी, शेर, समाज, हिन्दी साहित्य, hindi satire poem, masti, shayri, sher. Leave a Comment
अब संभव नहीं है
कोई कर सके
सागर का मंथन
या डाले हवाओं पर बंधन।
इसलिये नये फरिश्ते इस दुनियां के
रोकना चाहते हैं
जहरीली गैसों का उत्सर्जन
जिसे छोड़ते जा रहे हैं खुद
समंदर से अधिक खारे
विष से अधिक विषैले
नीम से अधिक कसैले अपनी
उन फरिश्तों ने महफिल सजाने के लिये
ढूंढ लिया है कोपेनहेगन।।
——–
वह समंदर मंथन कर
अमृत देवताओं [...]
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29
Nov
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, bharat, dharm, editoriyal, hindi writer, inlglish, jagran, mastram, web dunia, web duniya, web hindu times, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, webnavbharat, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, धर्म, मस्त राम, मस्तराम, संपादकीय, सन्देश, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दू. Tagged: adhyatm, आध्यात्म, संदेश, समाज, हिंदी साहित्य, हिन्दू, dharam, hindu, hindu sandesh, religion. Leave a Comment
यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः।
तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर कहते हैं कि जिसकी बुद्धि पाप से परे होकर कल्याण के मार्ग पर आ जाये वह इस संसार में हर वस्तु कि प्रकृतियों और विकृतियों को अच्छी तरह से जान लेता है।
अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्।
न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर [...]
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23
Sep
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आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय।
चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।।
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अपने मूंह से कभी आत्मप्रवंचना और दूसरे की निंदा न करें। क्योंकि कभी आचरण की ऊंचाई पर हमारे व्यकितत्व और कृतित्व को नापा गया तो तो पता नहीं क्या होगा?
दोष पराया देखि [...]
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27
Jul
Posted by दीपक भारतदीप in Enternment, India, adhyatm, alekh, hindi writer, inlglish, internet, jagran, manu smruti, mastram, web bhaskar, web dunia, web duniya, web hindu times, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, webnavbharat, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम. Tagged: adhyatm, अध्यात्म, ज्ञान, धर्म, संदेश, हिंदी साहित्य, हिन्दू, dharm, hindi sahitya, hindu. Leave a Comment
न नृत्येन्नैव गायेन वादित्राणि वादयेत्।
नास्फीट च क्ष्वेडेन्न च रक्तो विरोधयेत्।।
हिंदी में भावार्थ-मनुमहाराज कहते हैं कि नाचना गाना, वाद्य यंत्र बजाना ताल ठोंकना, दांत पीसकर बोलना ठीक नहीं और भावावेश में आकर गधे जैसा शब्द नहीं बोलना चाहिये।
न कुर्वीत वृथा चेष्टां न वार्य´्जलिना पिबेत्।
नौत्संगे भक्षयेद् भक्ष्यानां जातु स्यात्कुतूहली।।
हिंदी में भावार्थ-मनुमहाराज कहते हैं कि जिस कार्य को [...]
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2
Jun
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नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि
————————-
हर्त ज्ञार्न क्रियाहीनं हतश्चाऽज्ञानतो नर।
हर्त निर्नायकं सैन्यं स्त्रियो नष ह्यभर्तृकाः ।।
हिंदी में भावार्थ- जिस ज्ञान को आचरण में प्रयोग न किया जाये वह व्यर्थ है। अज्ञानी पुरुष हमेशा ही संकट में रहता हुआ ऐसे ही शीघ्र नष्ट हो जाता है जैसे सेनापति से रहित सेना युद्ध में स्वामीविहीन [...]
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12
May
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कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय
खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय
संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु की संगत में अगर भूसी भी मिलै तो वह भी श्रेयस्कर है। खीर तथा तमाम तरह के व्यंजन मिलने की संभावना हो तब भी दुष्ट व्यक्ति की संगत न करें।
कबीर संगत साधु [...]
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8
May
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भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि
——————–
कृमिकुलचितं लालाक्लिन्नं विगन्धिजुगुप्सितम्, निरुपमरसं प्रीत्या खादन्नस्थि निरामिषम्
सुरपतिमपि श्वा पाश्र्वस्थं विलोक्य न शंकते
न हि गणयति क्षुद्रो जन्तुः परिग्रहफल्गुताम्
हिदी में भावार्थ-कीड़ों,लार,दुर्गंध और देखने में गंदी रसहीन हड्डी को कुत्ता बहुत शौक से चबाता है। उस समय इंद्रदेव के अपने आने की परवाह भी नहीं होती। यही हालत स्वार्थी और नीच प्राणी की [...]
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24
Apr
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पत्थर कभी इतने नहीं उड़ाये गये
जितनी खबरें बन गयी।
खंजर कभी इतने नहीं घौंपे गये
जिनकी चर्चा से जमाने की भौहें तन गयी।
बस! बात इतनी है कि
अमन से रहते लोगों के दिमाग में
खौफ के जज़्बात की हवा का
एक झटका देना बहुत होता है
जिसमें बहकर वह बाजार चला आता है
दिल बहलाने के लिये
सौदागरों की जेब [...]
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21
Mar
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लोगों में सोच जगाने के लिये चला रहे सभी अभियान।
किताबों के गुलाम मिटाने निकले हैं गुलामी के निशान।।
नारी स्वतंत्रता का नारा लगाते हुए वह मुस्कराते हैं
गृहस्थी में पुरुष को बैल बनाने में ही देखते नारी की शान।।
पूरी जिंदगी दिखाया समाज को उन्होंने नया रास्ता
अपनी सोच से पैदल रहे,पराये ख्याल पर पाया सम्मान।।
मसीहा बनने की [...]
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28
Feb
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सादगी से कही बात
किसी को समझ में नहीं आती है
इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की
चाशनी में डुबो कर सुनाते हैं
अलंकारों में सजाते हैं
तो कुछ वीभत्स के विष से डराते हैं
आदमी में विषय के लिए जिज्ञासा जगाते हैं
आदमी के दिल में ही रहता है
प्यार और खौफ
जिसे कभी कवियों ने बहलाया था
अब तो बाजार [...]
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24
Feb
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अंतर्जाल के ब्लाग पर सामाजिक आंदोलन और जागरुकता के लिये प्रयास कोई अब नयी बात नहीं है। कुछ लोगों ने अभी हाल ही में वेलंटाईन डे के पहले तक इंटरनेट पर चले विवाद पर लिखे गये पाठों को देखकर यही निष्कर्ष निकाला है कि आने वाले समय में भारत के 4.2 [...]
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15
Feb
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कल वैलंटाईन डे बीत गया। पिछले प्रदंह दिन से उसका प्रचार जोरदार ढंग से हुआ। आज अनेक खबरें इस बारे में समाचार पत्र पत्रिकाओं और टीवी चैनलों में छायी हुईं हैं। अधिकतर लोगोंं का ध्यान सड़कों, पार्कों, होटलों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हुए अच्छे बुरे दृश्यों के विश्लेषण पर केंद्रित हैं पर [...]
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6
Feb
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अमेरिका के उद्योगपति बिल गेट्स ने कहा है कि वर्तमान मंदी अगले चार साल तक चल सकती है। बिल गेट्स विश्व में प्रसिद्ध उद्योगपति हैं और नये लोगों को उनसे प्रेरणा लेने को कहा जाता है। वैसे उन्होंने जो अनुमान लगाया है उसके जो आधार होंगे वह अमेरिका और पश्चिमी देशों के [...]
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31
Jan
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परदेस में पुजने से ही
देश में भगवान बनेंगे
कैसा यह उनका भ्रम है।
देश के लोगों से मिले मान से
क्या गौरव नहीं बढ़ता जो
बाहर से इनाम लूटने के लिये
दौड़ का नहीं थम रहा क्रम है।
मालिकों ने कर दिया आजाद
पर फिर भी गुलाम खड़े हैं इंतजार में
उनके दरवाजे पर
कृपा में शायद कोई मिल जाये इनाम
तो बढ़े अपने [...]
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23
Jan
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<strong>कुछ हकीकत कुछ ख्वाव
बन जाता है यूँ ही अफसाना
सुर्खियों में बने रहें अख़बारों की
चर्चा करे नाम की पूरा ज़माने
इसलिए कभी वह हादसों को ढूंढते हैं
न मिलें तो कर लेते, आगे होने का बहाना
जिन्हें आदत हो गयी भीड़ में चमकने की
उनको पसंद नहीं है हाशिये पर आना
लोगों की मस्ती और बेचैनी में ही
आता हैं उनको कमाना
जो [...]
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17
Jan
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, IN FAMILY, India, editoriyal, family, friends, hindi litreture, inlglish, mastram, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, संपादकीय, सन्देश, साहित्य. Tagged: arya, अनार्य, आर्य, इतिहास, जातियां, लेख, हिंदी साहित्य, hindi article, sahitya. Leave a Comment
आज एक समाचार में एक इतिहासकार द्वारा इतिहास में अयथार्थ से भरे तथ्यों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों से हटाने की मांग की गयी है। उन्होंने आर्यों से संबंधित कुछ तथ्यों का प्रतिवाद किया।
एक तो यह कि आर्य कभी आक्रामक नहीं रहे और उनके द्वारा कभी भी कहीं सामूहिक नरसंहार नहीं किया गया-यह पश्चिमी अवधारणा केवल [...]
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11
Jan
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, family, friends, hindi writer, inlglish, internet, jagran, media, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शेर-ओ-शायरी, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: अमन, कविता, जिंदगी, मनोरंजन, शायरी, शेर, समाज, हास्य, हिंदी साहित्य, hindi poem, kavita, shayri, sher, vyangya. Leave a Comment
निकले थे अंधेरे में माटी के चिराग ढूंढने
पर कांच के बल्ब के टुकड़े लग गये पांव में
रौशनी ने भी अपने रूप बदले हैं
शहर चमक रहे हैं चकाचौंध में
अंधेरे का घर है गांव में
मधुर स्वर सुनने की चाह में
पहुंच गये महफिल में
पर कान लगने फटने
सभी गाने वाले लगे थे कांव-कांव में
आंखों से देखने की चाह [...]
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7
Jan
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शायद वह लोग सही कहते हैं कि ‘हिंदी सिखाने के लिये रहीम,तुलसी और कबीर की रचनाओं को नहीं पढ़ाना चाहिये।’
लोग उनका विरोध कर रहे हैं पर विरोध करने वाले स्वयं ही किसी वैचारिक धरातल पर नहीं खड़े हैं। अगर हम देखें तो तुलसी, रहीम और कबीर की रचनायें हैं वह शुद्ध हिंदी की नहीं [...]
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4
Jan
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बेच रहे हैं मनोरंजन
कहते हैं उसे खबरें
भाषा के शब्दकोष से चुन लिए हैं
कुछ ख़ास शब्द
उनके अर्थ की बना रहे कब्रें
परदे पर दृश्य दिखा रहे हैं
और साथ में चिल्ला रहे हैं
अपनी आँख और कान पर भरोसा नहीं
दूसरों पर शक जता रहे हैं
इसलिए जुबान का भी जोर लगा रहे हैं
टीवी पर कान और आँख लगाए बैठे [...]
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25
Dec
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, abhivyakti, bharat, family, friends, inlglish, internet, mastram, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर, शेर-ओ-शायरी, सन्देश, साहित्य. Tagged: साहित्य. Leave a Comment
अपनी काबलियत पर न इतना इतराओ
इनाम यहां यूं ही नहीं मिल जाते हैं
भीख मांगने का भी होता है तरीका
लूटने के लिये भी चाहिए सलीका
लोगों की नजरें अब देख नहीं
जब कहीं बवंडर नहीं होता
समंदर भर आंसु बहाकर
जब तक कोई नहीं रोता
काबलियत को कर दो दरकिनार
फरेबी भी बदनाम होकर भी
यहां नाम तो पा जाते हैं
शौहरत होना [...]
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14
Dec
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, abhivyakti, adhyatm, alekh, dharm, editoriyal, family, friends, hindi litreture, internet, jagran, media, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, संपादकीय, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, हिन्दू. Leave a Comment
धर्म क्या है यह समझे बिना उसकी आलोचना करना गलत है। किसी भी धार्मिक विद्वान् ने अपने विचार से धर्म की आज तक कोई एक परिभाषा तय नहीं की , इसका कारण यह है कि जिन लोगों ने बुद्धिमान और शिक्षित होने का ठेका लिया है वह वादों-विवादों में इतना फंस [...]
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4
Dec
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लिखते लिखते कविता सड़ जाती है
न लिखो तो दिमाग में जड़ हो जाती है
शब्द बोलो तो कोई सुनता नहीं
कान है यहाँ तो, ख्याल है अन्यत्र कहीं
अपने जुबान से निकले शब्द अर्थहीन लगते हैं
अनसुने होकर अपने को ही ठगते हैं
सडांध लगती हैं अपने आसपास
इसलिए नीयत कविता लिखने को मचल जाती हैं
लिखा हुआ सड़ [...]
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8
Oct
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आम इंसानों की तरह
रोज जिंदगी गुजारते हैं
पर आ जाता है
पर सर्वशक्तिमान के दलाल
जब देते हैं संदेश
अपना ईमान बचाने का
तब सब भूल जाते हैं
दिल से इबादत तो
कम ही करते हैं लोग
पर उसके नाम पर
जंग करने उतर आते हैं
कौन कहता है कि
दुनियां के सारे धर्म
इंसान को इंसान की
तरह रहना सिखाते
ढेर सारी किताबों को
दिल से इज्जत देने की [...]
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19
Sep
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15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था या एक राष्ट्र के रूप में स्थापना हुई थी। परंतत्र देश स्वतंत्र हुआ पर क्या परतंत्र का मतलब गुलामी होता है। कुछ प्रश्न है जिन पर विचार किया जाना चाहिये। विचार होगा इसकी संभावना बहुत कम लगती है क्योंकि वाद ओर नारों पर चलने वाले भारतीय [...]
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10
Sep
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, editoriyal, family, hindi, hindi litreture, hindi writer, mastram, sher, sher-o-shayri, sindh kesri, web bhaskar, web dunia, web duniya, web panjab kesri, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: akela, अकेला, कविता, दोपहर, बहता पसीना, व्यंग्य, सुख की खातिर, हास्य-व्यंग्य, हिन्दी शायरी, family, hamdardi, hasya kavita, hasya-vyangy, khatir, love, mastram, pyar, sandesh, sukh. Leave a Comment
अपनों में गैर
और गैरों में अजनबी हो जाना
कितना सताता है
जब आदमी अपने को अकेला पाता है
भरी दोपहर में
शरीर से बहता पसीना
चलते जा रहे पांव
चंद पलों के मन के सुख की खातिर
जिस घर के अंदर झांका
वहीं जंग का मैदान पाता है
मांगने पर थोड़ा प्यार
इतराने लगते हैं लोग
देते हैं नसीहतें तमाम
पर चंद प्यार के लफ्ज बोलकर
हमदर्दी [...]
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7
Sep
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इस बात को कई लोग मानने लगे है कि योगासन, प्राणायाम और ध्यान से तन,मन और विचारों के विकास शरीर से निकल जाते हैं पर सवाल यह है कि आखिर करे कौन? लोग कहते हैं कि समय नहीं मिलता पर जब शरीर पर किसी रोग का हमला होता है तब चिकित्सकों के अस्पताल के बाहर [...]
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13
Aug
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, article, bharat, editoriyal, family, friends, hasya kavita, hasya-vyangya, hindi, hindi litreture, hindi writer, kavita, mastram, media, sahity, shayri, sher, sher-o-shayri, web bhaskar, web dunia, web duniya, web panjab kesri, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर, शेर-ओ-शायरी, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: आंखें, जमीन, जरूरत.हकीकत, बहानों, श्रृंगार, संगत, सत्य, eye, feelings, friends, hindi shayri, lier, neednes, sangat, sukh, truth. 1 Comment
सत्य से जितनी दूर जाओगे
भ्रम को उतना ही करीब पाओगे
खवाब भले ही हकीकत होने लगें
सपने चाहे सामने चमकने लगें
उम्मीदें भी आसमान में उड़ने लगें
पर तुम अपने पाँव हमेशा
जमीन पर ही रख पाओगे
झूठ को सच साबित करने के लिए
हजार बहानों की बैसाखियों की
जरूरत होती है
सच का कोई श्रृंगार नहीं होता
कटु होते हुए भी
उसकी संगत में [...]
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6
Aug
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, abhivyakti, bharat, editoriyal, family, friends, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, media, shayri, sher-o-shayri, web bhaskar, web dunia, web duniya, मस्तराम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: अनजान, उपहार, ऊबना, खरीदना, प्यार, भीड़, शेर, हिंदी कविता, bhid, kharid, ubna. Leave a Comment
जब भी हम ढूढ़ते हैं अपने लिए प्यार
पर मिलती है सब जगह से दुत्कार
खुद करो चाहे किसी से भी तुम
मांगो न किसी से इसका उपहार
लोग नहीं निकल पाते अपने दिल से
खरीदा और बिकता पैसे से यहाँ प्यार
भाषा में बहुत होते हैं सुन्दर शब्द
पर बोलने में सब लोग हैं लाचार
अपनों में कितना भी तलाशो नहीं मिलता
गैरों [...]
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29
Jul
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, IN FAMILY, India, abhivyakti, alekh, arebic, bharat, editoriyal, family, friends, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, mastram, media, shayri, sher, sher-o-shayri, web bhaskar, web dunia, web panjab kesri, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, चिंतन, दीपक भारतदीप, दोहे, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर, शेर-ओ-शायरी, सन्देश. Leave a Comment
एक सपना लेकर
सभी लोग आते हैं सामने
दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन
कहते हैं
‘तुम उस पर बैठ सकते हो
और कर सकते हो दुनियां पर शासन
उठाकर देखता हूं दृष्टि
दिखती है सुनसान सारी सृष्टि
न कहीं सिंहासन दिखता है
न शासन होने के आसार
कहने वाले का कहना ही है व्यापार
वह दिखाते हैं एक सपना
‘तुम हमारी बात मान लो
हमार [...]
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28
Jul
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, IN FAMILY, India, abhivyakti, anubhuti, article, bharat, family, friends, hasya kavita, hasya-vyangya, hindi, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, jagran, kavita, media, shayri, sher, sher-o-shayri, web bhaskar, web dunia, web duniya, web panjab kesri, अनुभूति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर, शेर-ओ-शायरी, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Leave a Comment
आज मजदूर दिवस है
आओ सब मिलकर नारे लगायें
जो गरीबों और मजदूरों को भायें
जन कल्याण और न्याय के लिये
जोर से आवाज उठायें
फिर भूल चाहे भूल जायें
एक ही दिन तो सब करना है
फिर कौन पूछेगा कोई कि
हम क्या कर रहे हैं
मजदूर दिवस कोई रोज नहीं आता
जो कोई फिक्र करें कि
उसके बाद भी कुछ करना होगा
फिर तो पूर [...]
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