Archive for the ‘editoriyal’ Category
हिन्दू धर्म सन्देश-बड़े लोगों का मुख ताकने वालों को धिक्कार (hindu dharam sandesh-bade logon ko mukh n tako)
Posted by: दीपक भारतदीप on December 18, 2009
विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)
Posted by: दीपक भारतदीप on November 29, 2009
भर्तृहरि नीति शतक-धन की ऊष्मा से रहित मनुष्य क्या रह जाता है (heat of money-hindu sandesh)
Posted by: दीपक भारतदीप on October 29, 2009
गुरु पूर्णिमा-तत्वज्ञान दे वही होता है सच्चा गुरु (article in hindi on guru purnima)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 26, 2009
स्त्रियों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on June 27, 2009
भर्तृहरि नीति शतक: भक्ति को धंधा न समझें
Posted by: दीपक भारतदीप on June 25, 2009
चाणक्य नीति-जो विद्या काम की न आये उसे पाना व्यर्थ
Posted by: दीपक भारतदीप on June 2, 2009
कौटिल्य का अर्थशास्त्र-घमंड से शुरू काम की नाकामी से व्यर्थ का तनाव होता है
Posted by: दीपक भारतदीप on May 30, 2009
मनुस्मृतिः हिंसा से कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं होता
Posted by: दीपक भारतदीप on May 10, 2009
आम ब्लाग लेखक के लिये कमाई अभी दूर की कौड़ी-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on April 26, 2009
अन्धविश्वास ने धर्म के प्रति विश्वास को कमजोर किया है-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on March 5, 2009
अंतर्जाल पर अंग्रेजी से नहीं बल्कि हिन्दी से ही बदलाव हो सकता है=आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on February 24, 2009
वैलंटाईन डे का एक दिन में शोर थमा (हास्य-व्यग्य)
Posted by: दीपक भारतदीप on February 15, 2009
मंदी का दौर:नया उपभोक्ता वर्ग कहां से आयेगा-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on February 6, 2009
मानव सभ्यता पर वाद-विवाद-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on January 17, 2009
अध्यात्म ज्ञान के बिना धर्म को समझना कठिन-चिंत्तन
Posted by: दीपक भारतदीप on December 14, 2008
अपनी-अपनी सब कहैं-हास्य व्यंग्य कवितायें
Posted by: दीपक भारतदीप on October 12, 2008
प्रेमपत्र लिखने का युग बीत गया-हास्य व्यंग्य कविता
Posted by: दीपक भारतदीप on October 2, 2008
तुम मोबाइल भाई बन जाओ-हास्य कविता hasya vyangya
Posted by: दीपक भारतदीप on September 14, 2008
महामशीन भी कैसे महादानव बन जायेगी-हास्य कविता
Posted by: दीपक भारतदीप on September 10, 2008
हमदर्दी जताने का ख्याल-हिन्दी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on September 10, 2008
योगासन के लिये समय तो निकालना ही होगा-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on September 7, 2008
आदमी स्वयं भ्रम में फंसा नजर आता-हिन्दी कविता
Posted by: दीपक भारतदीप on August 27, 2008
रहीम के दोहेःसहृदय लोगों को बुरी संगति नहीं फलती
Posted by: दीपक भारतदीप on August 26, 2008
सच को छिपाना कठिन-हिंदी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on August 13, 2008
रहीम के दोहेःईश्वर का वर्णन कोई नहीं कर सकता
Posted by: दीपक भारतदीप on August 7, 2008
प्यार बिकता हैं यहां-हिंदी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on August 6, 2008
कहने वाले का कहना ही है व्यापार-व्यंग्य कविता
Posted by: दीपक भारतदीप on July 29, 2008
जो वहां रखी हमदर्द की तस्वीर भी उड़ा ले जाते हैं-हिन्दी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on July 27, 2008
भृतहरि शतकःसज्जन की मित्रता पूर्वाद्ध की छाया के समान
Posted by: दीपक भारतदीप on July 26, 2008