प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय
जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि प्रेम करने की बात तो सभी करते हैं पर उसके वास्तविक रूप को कोई समझ नहीं पाता। प्रेम का सच्चा मार्ग तो वही है जहां परमात्मा की भक्ति और ज्ञान प्राप्त हो सके।
गुणवेता और [...]
Archive for the ‘anubhuti’ Category
12 Sep
कबीर वाणी-प्यार को सही ढंग से कोई नहीं समझता(kabir vani-pyar ka gyan)
9 Sep
चाणक्य नीति-प्रतिकार प्रतिहिंसा और प्रतिकार के भाव में दोष नहीं (chankya niti-time to time, life style)
संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे।
सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।।
हिन्दी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य जी कहते हैं कि इस विषरूपी संसार में दो तरह के फल अमृत की तरह लगते हैं। एक तो सज्जन लोगों की संगत और दूसरा अच्छी वाणी सुनना।
कृते प्रतिकृतं कुर्याद् हिंसने प्रतिहिसंनम्।
तत्र दोषो न पतति दुष्टे दुष्टे सामचरेत्
हिंदी में भावार्थ-अपने [...]
21 Aug
वैचारिक महाभारत की आवश्यकता-आलेख (baba shri ramdev,shri shri ravishankar & shri gita)
कभी समलैंगिकता तो कभी सच का सामना, युवक युवतियों के बिना विवाह साथ रहने और इंटरनेट पर यौन सामग्री से संबंधित सामग्री पर प्रतिबंध जैसे विषयों पर जूझ रहे अध्यात्मिक गुरुओं और समाज चिंतकों को देखकर लगता है कि वैचारिक रूप से इस देश में खोखलापन पूरी तरह से घर कर चुका है। इसलिये [...]
2 Aug
कौटिल्य का अर्थशास्त्र-कार्य के होते हैं तीन व्यसन (kautilya ka arthshastra in hindi)
वस्तुध्वशक्येषु समुद्यनश्चेच्छक्येषु मोहादसमुद्यश्मश्च।
शक्येषु कालेन समुद्यनश्व त्रिघैव कार्यव्यसनं वदंति।।
हिंदी में भावार्थ-शक्ति से परे वस्तु को प्राप्त करने का प्रयास करना, प्राप्त होने योग्य वस्तु के लिये उद्यम न करना , और तथा शक्ति होते हुए भी शक्य वस्तु की प्राप्ति के लिये समय निकल जाने पर प्रयास करना-यह कार्य के व्यसन हैं।
द्रोहो भयं शश्वदुपक्षणंव शीतोष्णवर्षाप्रसहिष्णुता च।
एतानि [...]
26 Jul
गुरु पूर्णिमा-तत्वज्ञान दे वही होता है सच्चा गुरु (article in hindi on guru purnima)
गुरु लोभी शिष लालची, दोनों खेले दांव।
दो बूड़े वापूरे,चढ़ि पाथर की नाव
जहां गुरु लोभी और शिष्य लालची हों वह दोनों ही अपने दांव खेलते हैं पर अंततः पत्थर बांध कर नदिया पर करते हुए उसमें डूब जाते हैं। आज पूरे देश में गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है। भारतीय अध्यात्म में गुरु का बहुत महत्व [...]
4 Jul
रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)
संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत
दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत
कविवर रहीम कहते हैं कि जिनके पास धन पर्याप्त मात्रा में लोग उनको सब कुछ देने को तैयार हो जाते हैं और जिसके पास कम है उसकी कोई सुधि नहीं लेता।
संपति भरम गंवाइ के, हाथ रहत कछु नाहिं
ज्यों रहीम ससि [...]
8 May
भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता
भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि
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कृमिकुलचितं लालाक्लिन्नं विगन्धिजुगुप्सितम्, निरुपमरसं प्रीत्या खादन्नस्थि निरामिषम्
सुरपतिमपि श्वा पाश्र्वस्थं विलोक्य न शंकते
न हि गणयति क्षुद्रो जन्तुः परिग्रहफल्गुताम्
हिदी में भावार्थ-कीड़ों,लार,दुर्गंध और देखने में गंदी रसहीन हड्डी को कुत्ता बहुत शौक से चबाता है। उस समय इंद्रदेव के अपने आने की परवाह भी नहीं होती। यही हालत स्वार्थी और नीच प्राणी की [...]
28 Feb
बाज़ार में बिकती है दवा और अमृत-हिंदी शायरी
सादगी से कही बात
किसी को समझ में नहीं आती है
इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की
चाशनी में डुबो कर सुनाते हैं
अलंकारों में सजाते हैं
तो कुछ वीभत्स के विष से डराते हैं
आदमी में विषय के लिए जिज्ञासा जगाते हैं
आदमी के दिल में ही रहता है
प्यार और खौफ
जिसे कभी कवियों ने बहलाया था
अब तो बाजार [...]
24 Feb
अंतर्जाल पर अंग्रेजी से नहीं बल्कि हिन्दी से ही बदलाव हो सकता है=आलेख
अंतर्जाल के ब्लाग पर सामाजिक आंदोलन और जागरुकता के लिये प्रयास कोई अब नयी बात नहीं है। कुछ लोगों ने अभी हाल ही में वेलंटाईन डे के पहले तक इंटरनेट पर चले विवाद पर लिखे गये पाठों को देखकर यही निष्कर्ष निकाला है कि आने वाले समय में भारत के 4.2 [...]
15 Feb
वैलंटाईन डे का एक दिन में शोर थमा (हास्य-व्यग्य)
कल वैलंटाईन डे बीत गया। पिछले प्रदंह दिन से उसका प्रचार जोरदार ढंग से हुआ। आज अनेक खबरें इस बारे में समाचार पत्र पत्रिकाओं और टीवी चैनलों में छायी हुईं हैं। अधिकतर लोगोंं का ध्यान सड़कों, पार्कों, होटलों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हुए अच्छे बुरे दृश्यों के विश्लेषण पर केंद्रित हैं पर [...]
6 Feb
मंदी का दौर:नया उपभोक्ता वर्ग कहां से आयेगा-आलेख
अमेरिका के उद्योगपति बिल गेट्स ने कहा है कि वर्तमान मंदी अगले चार साल तक चल सकती है। बिल गेट्स विश्व में प्रसिद्ध उद्योगपति हैं और नये लोगों को उनसे प्रेरणा लेने को कहा जाता है। वैसे उन्होंने जो अनुमान लगाया है उसके जो आधार होंगे वह अमेरिका और पश्चिमी देशों के [...]
4 Dec
अर्थ होता है पढने वाले की नीयत जैसा-हिन्दी शायरी
लिखते लिखते कविता सड़ जाती है
न लिखो तो दिमाग में जड़ हो जाती है
शब्द बोलो तो कोई सुनता नहीं
कान है यहाँ तो, ख्याल है अन्यत्र कहीं
अपने जुबान से निकले शब्द अर्थहीन लगते हैं
अनसुने होकर अपने को ही ठगते हैं
सडांध लगती हैं अपने आसपास
इसलिए नीयत कविता लिखने को मचल जाती हैं
लिखा हुआ सड़ [...]
28 Jul
श्रमिक पुत्र कभी अभिनेता नहीं बनता-हास्य कविता-व्यंग्य कविता
आज मजदूर दिवस है
आओ सब मिलकर नारे लगायें
जो गरीबों और मजदूरों को भायें
जन कल्याण और न्याय के लिये
जोर से आवाज उठायें
फिर भूल चाहे भूल जायें
एक ही दिन तो सब करना है
फिर कौन पूछेगा कोई कि
हम क्या कर रहे हैं
मजदूर दिवस कोई रोज नहीं आता
जो कोई फिक्र करें कि
उसके बाद भी कुछ करना होगा
फिर तो पूर [...]
27 Jul
जो वहां रखी हमदर्द की तस्वीर भी उड़ा ले जाते हैं-हिन्दी शायरी
मोहब्बत में साथ चलते हुए
सफर हो जाते आसान
नहीं होता पांव में पड़े
छालों के दर्द का भान
पर समय भी होता है बलवान
दिल के मचे तूफानों का
कौन पता लगा सकता है
जो वहां रखी हमदर्द की तस्वीर भी
उड़ा ले जाते हैं
खाली पड़ी जगह पर जवाब नहीं होते
जो सवालों को दिये जायें
वहां रह जाते हैं बस जख्मों के निशान
……………………………
जब [...]
26 Jul
भृतहरि शतकःसज्जन की मित्रता पूर्वाद्ध की छाया के समान
दुर्जनः परिहर्तवयो विद्ययाऽलङ्कृतोऽपि सन्
मणिनाः भूषितः सर्पः किमसौ न भयंकर
इसका आशय यह है कि कोई दुर्जन व्यक्ति विद्वान भी तो साथ छोड़ देना चाहिए। विषधर में मणि होती है पर इससे उससे उसका भयंकर रूप प्रिय नहीं हो जाता।
आरंभगुर्वी क्षयिणी क्रमेण लघ्वी पुरा वृद्धिमति च पश्चात्
दिनस्य पूर्वाद्र्धपराद्र्ध-भिन्ना छायेव मैत्री खलसज्जनानाम्
जिस तरह दिन की शुरूआत में [...]
19 Jul
संगीत का लेते नाम, मचाते कोहराम-हास्य कविता
गीत और संगीत से
दिल मिल जाते हैं पर
अब तो उसकी परख के लिये
प्रतियोगितायें को अब वह
महायुद्ध कहकर जमकर प्रचार कराते
वाद्ययंत्र हथियारों की तरह सजाये जाते
जिन सुरों से खिलना चाहिये मन
उससे हमले कराये जाते
मद्धिम संगीत और गीत से
तन्मय होने की चाहत है जिनके ख्याल में
उन पर शोर के बादल बरसाये जाते
कहें महाकवि दीपक बापू
‘अब गीत और [...]
4 Jul
भृतहरि शतकःमनुष्य इच्छा और आशा के कारण नाचता है
खलालापाः सोढा कथमपि तदाराश्र्चनपरैर्निगुह्मान्तर्वाष्पं हस्तिमपि शून्येन मनसा
कृतश्चियत्तस्तम्भः प्रहसितश्रिचयामञ्जलिरपि त्वमाशे मोघाशे किममपरमतो नर्तयसि माम्
हिंदी में भावार्थ-दुष्टजनों की सेवा करते हुए उनके ताने और व्यंग्य सुने। दुख के कारण हृदय में उमड्ने वाले आंसुओं को रोक और उनका मन रखने के लिए उनक सामने हंसने का दिखावा किया। मन को समझाकर उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनके [...]
22 Jun
चाणक्य नीति:शास्त्रों की निंदा करने वाले अल्पज्ञानी
1.आकाश में बैठकर किसी से वार्तालाप नहीं हो सकता, वहां कोई किसी का संदेश वाहक न जा सकता है और न वहां से आ सकता है जिससे कि एक दूसरे के यहां के रहस्यों जाना जा सकें। अंतरिक्ष के बारे में सामान्य मनुष्यों को कोई ज्ञान नहंी रहता पर फिर भी विद्वान लोगों ने सूर्यग्रहण [...]
20 Jun
भृतहरि शतक:नौकर का धर्म निभाना होता है कठिन
मौनान्मूकः प्रवचनपटूर्वातुलो जल्पको वा
धृष्टः पाश्र्वे वसति च सदा दूरतश्र्चाऽप्रगल्भ
क्षान्त्या भीरुर्यदि न सहते प्रायशो नाभिजातः
सेवाधर्मः परमगहना योगिनामप्यगम्यः
हिंदी में भावार्थ-इस संसार में सेवा का धर्म अत्यंत कठिन है। यदि सेवाक मौन रहे तो उसे गूंगा और बात करे तो बकवादी कहेंगे। अगर हमेशा ही अपने पास बैठा रहे तो ढीठ और दूर रहे तो मूर्ख माना जायेगा। [...]
18 May
कठपुतली का खेल तो अब भी चल रहा है (हास्य-व्यंग्य)
हम घर से बाहर निकल कर जैसे सायकल से सड़क पर आये तो एक सज्जन मिल गये और हमसे बोले-‘कहां जा रहे हो।’
हमने कहा-‘पुतले और पुतली का खेल देखने जा रहे हैं।’
वह बोले-‘‘कहां जा रहे हो? हमें भी बताओ। अरसा हो गया कठपुतली का खेल देखे। हमें भी बताओं तो हम भी अपनी कार से [...]
4 May
Translation, the author of nearly all the languages of tools will
I have some lessons to the Blog English translation in Hindi to read them. It is also written by Indian writers were. It seems that the world’s entire world Blog at the same time, however, one of them will appear as the written content of your country and the region has been the subject of [...]
4 May
Good news was not read – comic satire अच्छा हुआ खबर नहीं पढ़ी-हास्य व्यंग्य
My wife has asked the night -”What will eat?”
We have said -”Where we eat at night? So you take a cup of milk with him a small toast to be so afraid. Although you asked why?
Ira said – ‘you just write something to eat. I thought that perhaps you saw the hunger will take. When [...]
30 Apr
क्रिकेट मैच में एक्शन का सीन-हास्य कविता
बगल में अखबार दबाकर
घर आया फंदेबाज और बोला
‘दीपक बापु तुमने
पहले अखबारों और अब ब्लाग पर
क्रिकेट पर ही लिखना शुरू किया
फिर क्यों अब मूंह फेर लिया
देखो क्रिकेट में फिल्म के एक्शन का
मजा भी आ रहा है
पहले पिटा हीरो
अब पीटकर बाहर जा रहा है
क्यों नहीं तुम भी देखा करते
बैट-बाल के खेल में
मारधाड़ की भी मजा क्यों नहीं [...]
4 Feb
कभी कभी खामोशी भी बहुत भली
जब कभी में चौपालों पर लिखता हूँ तो ऐसा लगता है कि कुछ लोग नहीं चाहते कि मैं वहाँ कुछ लिखूं.
कल एक चिट्ठाकार मेरे चिट्ठे पर बदतमीजी भरी कमेन्ट लिख गया और सुबह मैं जल्दी में था इसलिए उसका कोई जवाब नहीं दे सकता था पर थोडा गुस्से में उसका ब्लोग देखकर आया और फिर [...]
28 Jan
हिन्दी के ठेकेदार- हास्य-व्यंग्य कविता
अंतर्जाल पर एकछत्र राज्य की
कोशिश ने कुछ लोगों को अंधा बना दिया
अपने दोस्त लेखकों की भीड़ जुटाकर
सम्मान की एक दुकान को सजा दिया
एक लेखकनुमा ब्लोगर जो
लिख नहीं पाता था कविता
पसंद भी नहीं था पढ़ना
चुन लाया कहीं से तीन सर्वश्रेष्ठ
और अपना फैसला सुना दिया
कवियों के ब्लोग दूर ही रखे गए
तकनीकी [...]
28 Jan
सपने सिर्फ सपने होते-हिन्दी साहित्य कविता
सपने में जब खोये रह्ते
कभी पूरी होंगे यही सोचकर
बहुत कुछ सहते
जब होता है हकीकतों की तपिश से सामना
तब सबके जिस्म जलने लगते
पूरे भी हो जाएं तो भी
सपने वैसे ही नहीं लगते
जिन्हें पालते-पोसते हैं बडे चाव से दिल में
कभी भी वह सपने सच होकर भी
अपनी नहीं लगते
हकीकतों से कब तक मुहँ [...]
27 Jan
सत्य से जितनी दूर जाओगे-हास्य कविता
सत्य से जितनी दूर जाओगे
भ्रम को उतना ही करीब पाओगे
खवाब भले ही हकीकत होने लगें
सपने चाहे सामने चमकने लगें
उम्मीदें भी आसमान में उड़ने लगें
पर तुम अपने पाँव हमेशा
जमीन से ऊपर नहीं उठा पाओगे
झूठ को सच साबित करने के लिए
हजार बहानों की बैसाखियों की
जरूरत होती है
सच का कोई श्रृंगार नहीं होता
कटु होते हुए भी
उसकी संगत [...]
27 Jan
रहीम के दोहे:मांगने से सम्मान कम होता है
जानि अनीती जे करैं, जागत ही रह सोई।
ताहि सिखाई जगाईबो, उचित न होई ॥
अर्थ-समझ-बूझकर भी जो व्यक्ति अन्याय करता है वह तो जागते हुए भी सोता है, ऐसे व्यक्ति को जाग्रत रहने के शिक्षा देना भी उचित नहीं है।
कविवर रहीम का आशय यह कई जो लोग ऐसा करते हैं उनके मन में दुर्भावना होती [...]
25 Jan
जिन्दगी ऐसे ही बीत जाती-कविता साहित्य
किसी की पीडा को दूर करने की कोशिश
जब हो जाती है नाकाम
बढ़ जाती है उसकी पीडा तो
हो जाते बदनाम
कमजोर दिल के लोगों के बीच
रहते हुए
किसी पर तरस खाने में डर लगता है
लोग दर्द के कम होने से अधिक
दूसरों को जख्म देकर खुश होने की
कोशिश कर चलाते हैं अपना काम
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समंदर की तरह उठती हैं
मन में [...]
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