Archive for the ‘alekh’ Category
हिन्दू धर्म सन्देश-बड़े लोगों का मुख ताकने वालों को धिक्कार (hindu dharam sandesh-bade logon ko mukh n tako)
Posted by: दीपक भारतदीप on December 18, 2009
कौटिल्य दर्शन-दोस्त और दुश्मन दो प्रकार के होते हैं (kautilya darshan-dost aur dushman)
Posted by: दीपक भारतदीप on October 31, 2009
श्री गीता से-वेद ज्ञान से बड़ी है ह्रदय से की गए भक्ति (ved aur bhakt-shri geeta in hindi)
Posted by: दीपक भारतदीप on September 13, 2009
चाणक्य नीति-प्रतिकार प्रतिहिंसा और प्रतिकार के भाव में दोष नहीं (chankya niti-time to time, life style)
Posted by: दीपक भारतदीप on September 9, 2009
कौटिल्य का अर्थशास्त्र-कार्य के होते हैं तीन व्यसन (kautilya ka arthshastra in hindi)
Posted by: दीपक भारतदीप on August 2, 2009
मनु स्मृति-गोद में रखकर भोजन करना ठीक नहीं (bhojan karne ka tarika-manu smruti)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 27, 2009
गुरु पूर्णिमा-तत्वज्ञान दे वही होता है सच्चा गुरु (article in hindi on guru purnima)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 26, 2009
रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 4, 2009
भर्तृहरि नीति शतक: भक्ति को धंधा न समझें
Posted by: दीपक भारतदीप on June 25, 2009
संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते
Posted by: दीपक भारतदीप on May 31, 2009
श्री गुरुवाणी-सत्संग से विचार निर्मल होते हैं
Posted by: दीपक भारतदीप on May 28, 2009
भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता
Posted by: दीपक भारतदीप on May 8, 2009
अंतर्जाल पर अंग्रेजी से नहीं बल्कि हिन्दी से ही बदलाव हो सकता है=आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on February 24, 2009
अध्यात्म ज्ञान के बिना धर्म को समझना कठिन-चिंत्तन
Posted by: दीपक भारतदीप on December 14, 2008
सुविधाओं के गुलाम-व्यंग्य
Posted by: दीपक भारतदीप on September 19, 2008
समाज की इमारत में आदमी पत्थर की तरह लग जाते-कविता साहित्य
Posted by: दीपक भारतदीप on July 30, 2008
कहने वाले का कहना ही है व्यापार-व्यंग्य कविता
Posted by: दीपक भारतदीप on July 29, 2008
जो वहां रखी हमदर्द की तस्वीर भी उड़ा ले जाते हैं-हिन्दी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on July 27, 2008
भृतहरि शतकःसज्जन की मित्रता पूर्वाद्ध की छाया के समान
Posted by: दीपक भारतदीप on July 26, 2008
देखें यह चालाकी है या चोरी या कोई प्रयोग-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on July 20, 2008
भृतहरि शतकःमनुष्य इच्छा और आशा के कारण नाचता है
Posted by: दीपक भारतदीप on July 4, 2008
संत कबीर वाणी:विषयी लोग दीप और संत हीरे समान होते हैं
Posted by: दीपक भारतदीप on July 3, 2008
भृतहरि शतकःसंतोष से अमीर-गरीब समान हो जाते हैं
Posted by: दीपक भारतदीप on July 1, 2008
रहीम के दोहे:शरीर रुपी बाजार में मन बिक गया
Posted by: दीपक भारतदीप on June 30, 2008
रहीम के दोहे:अपने मन की वेदना सबके सामने मत प्रगट करो
Posted by: दीपक भारतदीप on June 29, 2008
संत कबीर वाणी:टोना-टोटका सब झूठ है
Posted by: दीपक भारतदीप on June 28, 2008
संत कबीर वाणी:प्रपंची गुरूओं से कोई लाभ नहीं
Posted by: दीपक भारतदीप on June 27, 2008
चाणक्य नीति:शास्त्रों की निंदा करने वाले अल्पज्ञानी
Posted by: दीपक भारतदीप on June 22, 2008
भृतहरि शतक:नौकर का धर्म निभाना होता है कठिन
Posted by: दीपक भारतदीप on June 20, 2008
समाज के साथ होने का भ्रम पालना व्यर्थ-चिंतन
Posted by: दीपक भारतदीप on June 7, 2008