Archive for the ‘सन्देश’ Category
25
Dec
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, friends, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, jagran, mastram, media, web dunia, अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्त राम, मस्तराम, शब्द, सन्देश, हिन्दी. Tagged: कला, मनोरंजन, मस्ती, शायरी, शेर, समाज, हिन्दी साहित्य, hindi satire poem, masti, shayri, sher. Leave a Comment
अब संभव नहीं है
कोई कर सके
सागर का मंथन
या डाले हवाओं पर बंधन।
इसलिये नये फरिश्ते इस दुनियां के
रोकना चाहते हैं
जहरीली गैसों का उत्सर्जन
जिसे छोड़ते जा रहे हैं खुद
समंदर से अधिक खारे
विष से अधिक विषैले
नीम से अधिक कसैले अपनी
उन फरिश्तों ने महफिल सजाने के लिये
ढूंढ लिया है कोपेनहेगन।।
——–
वह समंदर मंथन कर
अमृत देवताओं [...]
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7
Dec
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, India, bharat, hindi litreture, hindu, inlglish, internet, mastram, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web hindu times, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, webnavbharat, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, मस्त राम, मस्तराम, सन्देश, समाज, साहित्य, हिन्दी. Tagged: adhyatm, आध्यात्म, धर्म, संदेश, हिंदी साहित्य, हिन्दू, dharm, hindi sahitya, hindu, sandesh. Leave a Comment
अपनीतं सुनीतेन योऽयं प्रत्यानिनीषते।
मतिमास्थाय सुदृढां तदकापुरुषव्रतम्।।
हिंदी में भावार्थ-जो अन्याय के कारण नष्ट हुए धन को अपनी स्थिर बुद्धि का आश्रय लेकर पवित्र नीति से वापस प्राप्त करने का संकल्प लेता है वह वीरता का आचरण करता है।
मार्दव सर्वभूतनामसूया क्षमा धृतिः।
आयुष्याणि बुधाः प्राहुर्मित्राणा चाभिमानना।।
हिंदी में भावार्थ-संपूर्ण जीवों के प्रति कोमलता का भाव, गुणों में दोष [...]
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29
Nov
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, bharat, dharm, editoriyal, hindi writer, inlglish, jagran, mastram, web dunia, web duniya, web hindu times, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, webnavbharat, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, धर्म, मस्त राम, मस्तराम, संपादकीय, सन्देश, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दू. Tagged: adhyatm, आध्यात्म, संदेश, समाज, हिंदी साहित्य, हिन्दू, dharam, hindu, hindu sandesh, religion. Leave a Comment
यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः।
तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर कहते हैं कि जिसकी बुद्धि पाप से परे होकर कल्याण के मार्ग पर आ जाये वह इस संसार में हर वस्तु कि प्रकृतियों और विकृतियों को अच्छी तरह से जान लेता है।
अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्।
न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर [...]
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29
Oct
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भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि
—————————————–
तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव नाम सा बुद्धिरप्रतिहता वचनं तदेव।
अर्थोष्मणा विरहितः पुरुषः क्षपोन सोऽष्यन्य एव भवतीति विचित्रमेतत्।।
हिंदी में भावार्थ-मनुष्य की इंद्रिया नाम,बुद्धि तथा अन्य सभी गुण वही होते हैं पर धन की उष्मा से रहित हो जाने पर पुरुष क्षणमात्र में क्या रह जाता है? धन की महिमा विचित्र है।
वर्तमान सन्दर्भ में संपादकीय व्याख्या- इस सृष्टि [...]
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13
Sep
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, India, adhyatm, alekh, bharat, dharm, hindi, hindu, inlglish, mastram, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web hindu times, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, webnavbharat, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्त राम, संपादकीय, सन्देश, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दू. Tagged: अध्यात्म, धर्म, भगवान श्रीकृष्ण, वेद, साहित्य, हिन्दू, geeta, hindi article, hindu adhyatm, ved. Leave a Comment
यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः।
वेदावादरताः पार्थ नान्यदरस्तीति वादिनः।।
कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्।
क्रियाविशेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति।।
भोगैश्वर्यप्रस्कतानां तयापहृतचेसाम्।।
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते।।
(श्री गीता के अध्याय दो के श्लोक क्र. 42, 43, 44)
हिंदी में भावार्थ-जो भोगों में तन्मय हो रहे हैं, जो कर्मफल के प्रशंसक वेदवाक्यों में ही प्रीति रखते हैं, जिनकी बुद्धि में स्वर्ग ही परम प्राप्य वस्तु है जो कहते [...]
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12
Sep
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, India, anubhuti, arebic, bharat, hindi litreture, inlglish, internet, jagran, kabir, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web hindu times, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, webnavbharat, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, दोहे, धर्म, सन्देश, हिन्दी, हिन्दू. Tagged: adhyatmik sandesh, अध्यात्म, धर्म, परमात्मा, समाज, हिंदी साहित्य, हिंदू, dharm, hindi article, hindu, kabir ke dohe, love, pyar. Leave a Comment
प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय
जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि प्रेम करने की बात तो सभी करते हैं पर उसके वास्तविक रूप को कोई समझ नहीं पाता। प्रेम का सच्चा मार्ग तो वही है जहां परमात्मा की भक्ति और ज्ञान प्राप्त हो सके।
गुणवेता और [...]
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9
Sep
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संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे।
सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।।
हिन्दी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य जी कहते हैं कि इस विषरूपी संसार में दो तरह के फल अमृत की तरह लगते हैं। एक तो सज्जन लोगों की संगत और दूसरा अच्छी वाणी सुनना।
कृते प्रतिकृतं कुर्याद् हिंसने प्रतिहिसंनम्।
तत्र दोषो न पतति दुष्टे दुष्टे सामचरेत्
हिंदी में भावार्थ-अपने [...]
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3
Sep
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अध्येयष्यमाणं तु गुरुर्नित्यकालमतन्द्रितः।
‘अधीष्व भो! इति ब्रुयाद्विरामोऽस्त्विति चारमेत्।।
हिंदी में भावार्थ-शिष्य को पढ़ाने के विषय में गुरु को कभी भी आलस नहीं बरतना चाहिये। इसके अलावा बेमन से भी अध्यापन का कार्य करना उचित नहीं है। अध्यापन प्रारंभ करने से पहले छात्र से कहना चाहिये कि ‘पढ़ो’ और समाप्ति पर कहना चाहिये कि विश्राम करो।
[...]
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2
Aug
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वस्तुध्वशक्येषु समुद्यनश्चेच्छक्येषु मोहादसमुद्यश्मश्च।
शक्येषु कालेन समुद्यनश्व त्रिघैव कार्यव्यसनं वदंति।।
हिंदी में भावार्थ-शक्ति से परे वस्तु को प्राप्त करने का प्रयास करना, प्राप्त होने योग्य वस्तु के लिये उद्यम न करना , और तथा शक्ति होते हुए भी शक्य वस्तु की प्राप्ति के लिये समय निकल जाने पर प्रयास करना-यह कार्य के व्यसन हैं।
द्रोहो भयं शश्वदुपक्षणंव शीतोष्णवर्षाप्रसहिष्णुता च।
एतानि [...]
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26
Jul
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गुरु लोभी शिष लालची, दोनों खेले दांव।
दो बूड़े वापूरे,चढ़ि पाथर की नाव
जहां गुरु लोभी और शिष्य लालची हों वह दोनों ही अपने दांव खेलते हैं पर अंततः पत्थर बांध कर नदिया पर करते हुए उसमें डूब जाते हैं। आज पूरे देश में गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है। भारतीय अध्यात्म में गुरु का बहुत महत्व [...]
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9
Jul
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रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय
नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय
कविवर रहीम के मतानुसार मन लगाकर कोई काम कर देखें तो कैसे सफलता मिलती है। अगर अच्छी नीयत से प्रयास किया जाये तो नर क्या नारायण को भी अपने बस में किया जा सकता है।
वर्तमान संदर्भ में व्याख्या-लोग बहुत जल्दी सफलता [...]
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27
Jun
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देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो गयी है कि एक दिन में पांच पांच समाचार आते हैं और जब अपराधी पकड़े जाते हैं तो यह याद रखना कठिन हो जाता है कि आखिर वह किस घटना के लिये पकड़े गये [...]
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25
Jun
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, India, abhivyakti, adhyatm, alekh, dharm, dohe, editoriyal, hindi litreture, hindi writer, hindu, inlglish, internet, jagran, mastram, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web hindu times, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, webnavbharat, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, सन्देश, साहित्य. Tagged: adhyatm, amrut sandesh, अध्यात्म, उपनिषद, गीता, धर्म, पुराण, वेद, हिंदी साहित्य, हिंदू, dharm, gita, hindi amrut, hindi sahitya, ved. Leave a Comment
भर्तृहरि कहते हैं कि
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कि वेदैः स्मृतिभिः पुराणपठनैः शास्त्रेर्महाविस्तजैः स्वर्गग्रामकुटीनिवासफलदैः कर्मक्रियाविभ्रमैः।
मुक्त्वैकं भवदुःख भाररचना विध्वंसकालानलं स्वात्मानन्दपदप्रवेशकलनं शेषाः वणिगवृत्तयं:।।
हिंदी में भावार्थ- वेद, स्मुतियों और पुराणों का पढ़ने और किसी स्वर्ग नाम के गांव में निवास पाने के लये कर्मकांडों को निर्वाह करने से भ्रम पैदा होता है। जो परमात्मा संसार के दुःख और तनाव से मुक्ति दिला सकता [...]
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22
Jun
Posted by दीपक भारतदीप in India, bharat, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, jagran, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, हिन्दू. Tagged: अध्यात्म, आलेख, धर्म, हिंदी साहित्य, हिंदू, chankya niti, dharm, hindi sahitya, hindu, sandesh. Leave a Comment
नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि
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लोभश्चेदगुणेन किं पिंशुनता यद्यस्ति किं पासकैः सत्यं चेतपसा च किं शुचि मनो यद्यस्ति तीर्थेन किम्।
सौजन्यं यदि किं गुणैः सुमहिमा यस्ति किं मण्डनैः सद्विद्या यदि किं धनैरपयशो यस्ति किं मृत्युना।।
हिंदी में भावार्थ-मनुष्य में यदि लोभ का भाव है तो फिर किसी दूसरे दोष की उसे आवश्यकता नहीं है। यदि उसके स्वभाव [...]
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20
Jun
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, India, bharat, dharm, hindi writer, inlglish, internet, jagran, mastram, religion, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अध्यात्म, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, हिन्दू. Tagged: अध्यात्म, धर्म, संदेश, हिंदी ज्ञान, हिंदी साहित्य, हिंदू, dharm, gyan, hindi article, hindu, sandesh. Leave a Comment
कौमे संकोचभास्य प्रहारमपि मर्धयेत्।
काले प्रापते तु मतिमानुत्तिश्ठेत्क्रूरसर्पवत्।।
हिंदी में भावार्थ-अपने समय के अनुसार जीवन में रणनीति बनाते हुए कछुए के समान अंग समेटकर शत्रु का प्रहार भी सहन करें तो और उचित अवसर देखकर सांप के समान प्रहार भी करें।
मतप्रमतवत् स्थित्वा ग्रसदुत्पलुत्य पण्डितः।
अपरिभश्यमानं हि क्रमप्राप्ते मृगेन्द्रवत्।।
हिंदी में भावार्थ-बुद्धिमान व्यक्ति को मत्त और प्रमत्त के समान दिखावे [...]
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28
May
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‘जो जो कथै सुनै हरि कीरतन ता की दुरमति नासु।’
सगन मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आसु।।’’
हिंदी में भावार्थ-श्रीगुरु ग्रंथ साहिब वाणी के अनुसार जो व्यक्ति हरि का कीर्तन सुनते है उनकी दुर्बुद्धि का नाश होता है। श्री गुरुनानक जी कहते हैं कि उनकी सारी आशायें पूरी हो जाती हैं।
‘कलजुग महिं कीरतन परधाना।‘
हिंदी में भावार्थ- श्रीगुरु [...]
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22
May
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रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय
जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय
कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई होने पर उसका फ़ल अवश्य दिखाई देता है। जैसे दीपक अंधकार को दूर कर देता है, परंतु शीघ्र ही कालिमा उगलने लगता है।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-अक्सर लोग सोचते हैं कि दूसरे से [...]
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20
May
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संत कबीर महाराज कहते हैं कि
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कबीर तो सांचै मतै, सहै जू सनमुख वार
कायर अनी चुभाय के, पीछे झखै अपार
सच्चा वीर तो वह है जो सामने आकर लड़ता है पर जो कायर है वर पीठ पीछे से वार करता है।
तीर तुपक सों जो लड़ैं, सो तो सूरा नाहिं
सूरा सोइ सराहिये, बांटि बांटि धन खांहि
संत [...]
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12
May
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कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय
खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय
संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु की संगत में अगर भूसी भी मिलै तो वह भी श्रेयस्कर है। खीर तथा तमाम तरह के व्यंजन मिलने की संभावना हो तब भी दुष्ट व्यक्ति की संगत न करें।
कबीर संगत साधु [...]
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9
May
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, India, bhruthari shatak, hindu, inlglish, internet, jagran, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: adhyatm, अध्यात्म, धर्म, हिंदू, हिन्दी साहित्य, bhartrihari niti shatak, dharm, hindi sahitya, hindu. Leave a Comment
भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि
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स्वायत्तेमेकांतगुणं विधात्रा विनिर्मितम् छादनमज्ञतायाः।
विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितनाम्।।
हिंदी में भावार्थ-विधाता ने स्वयं को एकांत में मौन रहने का गुण बनाया है उसके लिये किसी के सामने याचना करने की आवश्यकता नहीं है। मनुष्य चाहे जब एकांत में बैठकर मौन रह सकता है। समाज में रहते हुए मौन रहने की शक्ति किन्हीं [...]
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8
May
Posted by दीपक भारतदीप in Enternment, India, abhivyakti, adhyatm, alekh, anubhuti, bhruthari shatak, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, jagran, mastram, media, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, शब्द, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: अध्यात्म, धर्म, संदेश, हिंदी साहित्य, हिंदू, bhartarhari, dharm, hindi article, ram, ramayan, Relegion. Leave a Comment
भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि
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कृमिकुलचितं लालाक्लिन्नं विगन्धिजुगुप्सितम्, निरुपमरसं प्रीत्या खादन्नस्थि निरामिषम्
सुरपतिमपि श्वा पाश्र्वस्थं विलोक्य न शंकते
न हि गणयति क्षुद्रो जन्तुः परिग्रहफल्गुताम्
हिदी में भावार्थ-कीड़ों,लार,दुर्गंध और देखने में गंदी रसहीन हड्डी को कुत्ता बहुत शौक से चबाता है। उस समय इंद्रदेव के अपने आने की परवाह भी नहीं होती। यही हालत स्वार्थी और नीच प्राणी की [...]
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6
May
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, India, hasya-vyangya, hindi litreture, hindi writer, inlglish, media, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, मस्त राम, सन्देश, साहित्य. Tagged: क्रिकेट मैच, गासिप, फिल्म, भारत, मनोरंजन, हिंदी साहित्य, cricket matich, hasya-vyangya, hindi article, India. Leave a Comment
वह ब्लाग क्रिकेट की वजह से ही लोकप्रिय हो रहा है। हुआ यह कि एक अभिनेता की की कोई एक क्रिकेट टीम है। इसी अभिनेता ने अपना एक ब्लाग भी खोल रखा है। यानि क्रिकेट और ब्लाग में उसका बराबर का दखल है। ब्लाग और क्रिकेट दोनेां ही प्रचार के वजह से ही लोकप्रिय होते [...]
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3
May
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, bharat, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, jagran, rahim, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दोहे, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: astha, आसक्ति, धर्म, विषय, संसार, सत्संग, हिन्दी साहित्य, family, hindi, rahim ke dohe, sanskar. Leave a Comment
कविवर रहीम कहते हैं
रहिमन आलस भजन में, विषय सुखहिं लपटाय
घास चरै पसु स्वाद तै, गुरु गुलिलाएं खाय
मनुष्य भजन में तो आलस्य कर जाता है पर जिन विषयों में सुख लिप्त है उनको अपने साथ सदैव लिपटाये रहता है। जैसे पशू बेस्वाद घास को तो स्वयं ही खाते हैं पर जो गुड़ उनके स्वास्थ्य [...]
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27
Apr
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, inlglish, internet, mastram, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, सन्देश. Tagged: मनोरंजन, शायरी, शेर, समाज, हास्य, हिंदी साहित्य, hindi poem, kavita, shayri, sher, vyangya. Leave a Comment
कवि की हाजिरी पर प्रसन्न होकर
अपने दरबार में प्रकट हुए सर्वशक्तिमान
और बोले
‘दो में से एक वर मांग ले
पहला इस जन्म में अपनी
कविताओं के हिट होने का वरदान
पर इससे नहीं पैसे के लिहाज से तुम धनवान
या अगले जन्म में किसी प्रकाशक का
चमचा बनकर दौलत कमायेगा
और पायेगा दुनियां भर का सम्मान
पर कविता की नहीं होगी [...]
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24
Apr
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, family, friends, hasya kavita, hasya-vyangya, hindi, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, jagran, manu smruti, mastram, media, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, दीपक भारतदीप, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: अमन, इंसान, कविता, खंजर, जमीन, दिमाग, बाजार, मनोरंजन, शेर, हवा, हिन्दी साहित्य, bazar, hindi kavita, shayri, sher. Leave a Comment
पत्थर कभी इतने नहीं उड़ाये गये
जितनी खबरें बन गयी।
खंजर कभी इतने नहीं घौंपे गये
जिनकी चर्चा से जमाने की भौहें तन गयी।
बस! बात इतनी है कि
अमन से रहते लोगों के दिमाग में
खौफ के जज़्बात की हवा का
एक झटका देना बहुत होता है
जिसमें बहकर वह बाजार चला आता है
दिल बहलाने के लिये
सौदागरों की जेब [...]
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5
Mar
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एक मित्र ब्लाग लेखक सुरेश चिपलूनकर ने कल कुछ फोटो बनारस शहर और गंगा नदी के भेजे। वह हिंदी ब्लागजगत के सक्रिय लेखक होने के साथ दूसरों से सतत संपर्क रखने की कला में भी सिद्ध हस्त हैं और अक्सर ऐसे फोटो और वेबसाईटें ईमेल पर भेजते रहते हैं जो वैचारिक और चिंतन [...]
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28
Feb
Posted by दीपक भारतदीप in Enternment, anubhuti, arebic, article, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, media, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर-ओ-शायरी, सन्देश, साहित्य. Tagged: कला, कविता, बाज़ार, मनोरंजन, शेर, हिंदी साहित्य, entertainment, hindi article, kavita, poem, shayri, sher. Leave a Comment
सादगी से कही बात
किसी को समझ में नहीं आती है
इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की
चाशनी में डुबो कर सुनाते हैं
अलंकारों में सजाते हैं
तो कुछ वीभत्स के विष से डराते हैं
आदमी में विषय के लिए जिज्ञासा जगाते हैं
आदमी के दिल में ही रहता है
प्यार और खौफ
जिसे कभी कवियों ने बहलाया था
अब तो बाजार [...]
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15
Feb
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, India, abhivyakti, anubhuti, editoriyal, family, friends, hindi writer, inlglish, internet, jagran, mastram, media, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, सन्देश. Tagged: art, उपहार, कला, मनोरंजन, वैलंटाईन डे, संपादकीय, समाज, हिंदी साहित्य, Enternment, hindi article. Leave a Comment
कल वैलंटाईन डे बीत गया। पिछले प्रदंह दिन से उसका प्रचार जोरदार ढंग से हुआ। आज अनेक खबरें इस बारे में समाचार पत्र पत्रिकाओं और टीवी चैनलों में छायी हुईं हैं। अधिकतर लोगोंं का ध्यान सड़कों, पार्कों, होटलों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हुए अच्छे बुरे दृश्यों के विश्लेषण पर केंद्रित हैं पर [...]
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6
Feb
Posted by दीपक भारतदीप in Enternment, IN FAMILY, India, anubhuti, editoriyal, friends, hindi writer, inlglish, internet, jagran, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, संपादकीय, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: america, उद्योग, बाजार, मनोरंजन, व्यापार, समाज, हिंदी साहित्य, bazar, hindi article, India, obama. Leave a Comment
अमेरिका के उद्योगपति बिल गेट्स ने कहा है कि वर्तमान मंदी अगले चार साल तक चल सकती है। बिल गेट्स विश्व में प्रसिद्ध उद्योगपति हैं और नये लोगों को उनसे प्रेरणा लेने को कहा जाता है। वैसे उन्होंने जो अनुमान लगाया है उसके जो आधार होंगे वह अमेरिका और पश्चिमी देशों के [...]
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31
Jan
Posted by दीपक भारतदीप in Deepak Bharatdeep, Enternment, family, friends, hasya kavita, hasya-vyangya, hindi litreture, hindi writer, inlglish, internet, jagran, mastram, religion, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web panjabkesrei, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शेर-ओ-शायरी, सन्देश, साहित्य, हिन्दी. Tagged: कला, मनोरंजन, शायरी, शेर, समाज, हिंदी साहित्य, hindi poem, kavita, sahitya, shayri, sher. Leave a Comment
परदेस में पुजने से ही
देश में भगवान बनेंगे
कैसा यह उनका भ्रम है।
देश के लोगों से मिले मान से
क्या गौरव नहीं बढ़ता जो
बाहर से इनाम लूटने के लिये
दौड़ का नहीं थम रहा क्रम है।
मालिकों ने कर दिया आजाद
पर फिर भी गुलाम खड़े हैं इंतजार में
उनके दरवाजे पर
कृपा में शायद कोई मिल जाये इनाम
तो बढ़े अपने [...]
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