Archive for the ‘मस्तराम’ Category
हिन्दू धर्म सन्देश-बड़े लोगों का मुख ताकने वालों को धिक्कार (hindu dharam sandesh-bade logon ko mukh n tako)
Posted by: दीपक भारतदीप on December 18, 2009
हिन्दू धर्म संदेश-सदगुणों से ही आयु बढ़ती है (sadgun aur ayu-hindu dharm sandesh)
Posted by: दीपक भारतदीप on December 7, 2009
विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)
Posted by: दीपक भारतदीप on November 29, 2009
मनु स्मृति-अध्ययन में सुस्ती नहीं करें (manu smriti-shiksha aur susti)
Posted by: दीपक भारतदीप on September 3, 2009
विदुर नीति-अमीर रिश्तेदार के पास जाकर बेकार में दुःख पाना (vidur niti-amir ke pas jana)
Posted by: दीपक भारतदीप on August 8, 2009
कौटिल्य का अर्थशास्त्र-कार्य के होते हैं तीन व्यसन (kautilya ka arthshastra in hindi)
Posted by: दीपक भारतदीप on August 2, 2009
विदुर नीति-बुद्धिमान से बैर करना ठीक नहीं (buddhiman se bair-vidur niti)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 19, 2009
रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 4, 2009
भर्तृहरि नीति शतक: भक्ति को धंधा न समझें
Posted by: दीपक भारतदीप on June 25, 2009
चाणक्य नीति-निंदा का दुर्गुण हो तो अन्य पाप की क्या जरूरत
Posted by: दीपक भारतदीप on June 22, 2009
कौटिल्य का अर्थशास्त्र-शत्रु पर सिंह की तरह प्रहार करें
Posted by: दीपक भारतदीप on June 20, 2009
चाणक्य नीति-जो विद्या काम की न आये उसे पाना व्यर्थ
Posted by: दीपक भारतदीप on June 2, 2009
संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते
Posted by: दीपक भारतदीप on May 31, 2009
संत कबीर वाणीः अच्छा खाने को मिले तो भी बेवकूफ की संगत न करें
Posted by: दीपक भारतदीप on May 12, 2009
कवि ने वरदान माँगा -हास्य कविता
Posted by: दीपक भारतदीप on April 27, 2009
पुरुष को बैल बनाने में ही देखते नारी की शान-व्यंग्य ग़ज़ल
Posted by: दीपक भारतदीप on March 21, 2009
सादगी से कही बात किसी के समझ में नहीं आती-हिंदी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on March 14, 2009
बाज़ार में बिकती है दवा और अमृत-हिंदी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on February 28, 2009
अंतर्जाल पर अंग्रेजी से नहीं बल्कि हिन्दी से ही बदलाव हो सकता है=आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on February 24, 2009
वैलंटाईन डे का एक दिन में शोर थमा (हास्य-व्यग्य)
Posted by: दीपक भारतदीप on February 15, 2009
आजाद होकर भी गुलाम खड़े मालिकों की कृपा के इंतजार में -हास्य व्यंग्य कविताएँ
Posted by: दीपक भारतदीप on January 31, 2009
बाज़ार में खौफ का अफ़साना-हिन्दी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on January 23, 2009
मानव सभ्यता पर वाद-विवाद-आलेख
Posted by: दीपक भारतदीप on January 17, 2009
रौशनी ने भी अपने रूप बदले हैं-हिंदी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on January 11, 2009
कतरनों में मनोरंजन -हास्य कविताऐं
Posted by: दीपक भारतदीप on January 4, 2009
फरेबी भी बदनाम होकर नाम तो पा जाते हैं-व्यंग्य कविता
Posted by: दीपक भारतदीप on December 25, 2008
अर्थ होता है पढने वाले की नीयत जैसा-हिन्दी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on December 4, 2008
सुविधाओं के गुलाम-व्यंग्य
Posted by: दीपक भारतदीप on September 19, 2008
अपने को बैचेन कर शान्ति ढूँढने जाते-हिन्दी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on September 17, 2008
हमदर्दी जताने का ख्याल-हिन्दी शायरी
Posted by: दीपक भारतदीप on September 10, 2008