Archive for the ‘दोहे’ Category
कबीर वाणी-प्यार को सही ढंग से कोई नहीं समझता(kabir vani-pyar ka gyan)
Posted by: दीपक भारतदीप on September 12, 2009
संत कबीर के-रात के सपने निराशा का भाव पैदा करते हैं (sant kabir-rat ke sapne aur nirasha)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 31, 2009
रहीम क दोहे- दिल लगाकर कम करें कामयाबी तय करें (rahim ke dohe)
Posted by: दीपक भारतदीप on July 9, 2009
रहीम दास के दोहे: पशु अपना हित करने वाला गुड़ कभी नहीं खाते
Posted by: दीपक भारतदीप on May 3, 2009
रहीम के दोहेःईश्वर का वर्णन कोई नहीं कर सकता
Posted by: दीपक भारतदीप on August 7, 2008
कहने वाले का कहना ही है व्यापार-व्यंग्य कविता
Posted by: दीपक भारतदीप on July 29, 2008
रहीम के दोहे:देता तो परमात्मा है किसी अन्य का भ्रम मत पालो
Posted by: दीपक भारतदीप on July 2, 2008
रहीम के दोहे:अपने मन की वेदना सबके सामने मत प्रगट करो
Posted by: दीपक भारतदीप on June 29, 2008
संत कबीर वाणी:टोना-टोटका सब झूठ है
Posted by: दीपक भारतदीप on June 28, 2008
संत कबीर वाणी:प्रपंची गुरूओं से कोई लाभ नहीं
Posted by: दीपक भारतदीप on June 27, 2008
कबीर संदेशःअहंकार होता है पतन का कारण
Posted by: दीपक भारतदीप on May 24, 2008
रहीम के दोहे:मांगने से सम्मान कम होता है
Posted by: दीपक भारतदीप on January 27, 2008