Archive for the ‘कविता’ Category

विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)

यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः।
तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर कहते हैं कि जिसकी बुद्धि पाप से परे होकर कल्याण के मार्ग पर आ जाये वह इस संसार में हर वस्तु कि प्रकृतियों और विकृतियों को अच्छी तरह से जान लेता है।
अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्।
न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।।
हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर [...]

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पत्थर कभी इतने नहीं उड़े जितनी खबरें बनी-हास्य व्यंग्य कविता

पत्थर कभी इतने नहीं उड़ाये गये
जितनी खबरें बन गयी।
खंजर कभी इतने नहीं घौंपे गये
जिनकी चर्चा से जमाने की भौहें तन गयी।
बस! बात इतनी है कि
अमन से रहते लोगों के दिमाग में
खौफ के जज़्बात की हवा का
एक झटका देना बहुत होता है
जिसमें बहकर वह बाजार चला आता है
दिल बहलाने के लिये
सौदागरों की जेब [...]

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पुरुष को बैल बनाने में ही देखते नारी की शान-व्यंग्य ग़ज़ल

लोगों में सोच जगाने के लिये चला रहे सभी अभियान।
किताबों के गुलाम मिटाने निकले हैं गुलामी के निशान।।
नारी स्वतंत्रता का नारा लगाते हुए वह मुस्कराते हैं
गृहस्थी में पुरुष को बैल बनाने में ही देखते नारी की शान।।
पूरी जिंदगी दिखाया समाज को उन्होंने नया रास्ता
अपनी सोच से पैदल रहे,पराये ख्याल पर पाया सम्मान।।
मसीहा बनने की [...]

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सादगी से कही बात किसी के समझ में नहीं आती-हिंदी शायरी

सादगी से कही बात
किसी को समझ में नहीं आती है
इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की
चाशनी में डुबो कर सुनाते हैं
अलंकारों में सजाते हैं
तो कुछ वीभत्स के विष से डराते हैं
आदमी में विषय के लिए जिज्ञासा जगाते हैं
आदमी के दिल में ही रहता है
प्यार और खौफ
जिसे कभी कवियों ने बहलाया था
अब तो बाजार [...]

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आजाद होकर भी गुलाम खड़े मालिकों की कृपा के इंतजार में -हास्य व्यंग्य कविताएँ

परदेस में पुजने से ही
देश में भगवान बनेंगे
कैसा यह उनका भ्रम है।
देश के लोगों से मिले मान से
क्या गौरव नहीं बढ़ता जो
बाहर से इनाम लूटने के लिये
दौड़ का नहीं थम रहा क्रम है।
मालिकों ने कर दिया आजाद
पर फिर भी गुलाम खड़े हैं इंतजार में
उनके दरवाजे पर
कृपा में शायद कोई मिल जाये इनाम
तो बढ़े अपने [...]

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फरेबी भी बदनाम होकर नाम तो पा जाते हैं-व्यंग्य कविता

अपनी काबलियत पर न इतना इतराओ
इनाम यहां यूं ही नहीं मिल जाते हैं
भीख मांगने का भी होता है तरीका
लूटने के लिये भी चाहिए सलीका
लोगों की नजरें अब देख नहीं
जब कहीं बवंडर नहीं होता
समंदर भर आंसु बहाकर
जब तक कोई नहीं रोता
काबलियत को कर दो दरकिनार
फरेबी भी बदनाम होकर भी
यहां नाम तो पा जाते हैं
शौहरत होना [...]

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अपने को बैचेन कर शान्ति ढूँढने जाते-हिन्दी शायरी

चलने को ताज महल भी चल जाता है
हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है
चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है
तारा तोड़ कर जमीन पर सजाया जाता है
बेचने वाला सौदागर होना चाहिए
ख्वाब और भ्रम बेचना यहां आसान है
अपढ़ क्या पढ़ालिखा भी खरीददार बन जाता है
सच से परे ज्ञान पाकर
अक्ल से कौन काम कर पायेगा
जिनके पास [...]

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सच को छिपाना कठिन-हिंदी शायरी

सत्य से जितनी दूर जाओगे
भ्रम को उतना ही करीब पाओगे
खवाब भले ही हकीकत होने लगें
सपने चाहे सामने चमकने लगें
उम्मीदें भी आसमान में उड़ने लगें
पर तुम अपने पाँव हमेशा
जमीन पर ही रख पाओगे
झूठ को सच साबित करने के लिए
हजार बहानों की बैसाखियों की
जरूरत होती है
सच का कोई श्रृंगार नहीं होता
कटु होते हुए भी
उसकी संगत में [...]

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कहने वाले का कहना ही है व्यापार-व्यंग्य कविता

एक सपना लेकर
सभी लोग आते हैं सामने
दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन
कहते हैं
‘तुम उस पर बैठ सकते हो
और कर सकते हो दुनियां पर शासन
उठाकर देखता हूं दृष्टि
दिखती है सुनसान सारी सृष्टि
न कहीं सिंहासन दिखता है
न शासन होने के आसार
कहने वाले का कहना ही है व्यापार
वह दिखाते हैं एक सपना
‘तुम हमारी बात मान लो
हमार [...]

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संगीत का लेते नाम, मचाते कोहराम-हास्य कविता

गीत और संगीत से
दिल मिल जाते हैं पर
अब तो उसकी परख के लिये
प्रतियोगितायें को अब वह
महायुद्ध कहकर जमकर प्रचार कराते
वाद्ययंत्र हथियारों की तरह सजाये जाते
जिन सुरों से खिलना चाहिये मन
उससे हमले कराये जाते
मद्धिम संगीत और गीत से
तन्मय होने की चाहत है जिनके ख्याल में
उन पर शोर के बादल बरसाये जाते
कहें महाकवि दीपक बापू
‘अब गीत और [...]

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पैसा लेकर दिल बहलाने के लिए-hindi poem

मनोरंजन के लिए किसी
दृश्य, वस्तु या आदमी की चाहत
इन्सान को मजबूर करती है
इधर-उधर जाने के लिए
बाजार में कई बुत खडे है
पैसा लेकर दिल बहलाने के लिए
भटकते मन को चैन और खुशी
चंद सिक्के दिला देते हैं
जब ऊब जाये हंसने से
मनोरंजन के लिए दहला भी देते हैं
बिकता है मनोरंजन भी
पैसा लेकर दिल बहलाने [...]

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हिन्दी के ठेकेदार- हास्य-व्यंग्य कविता

अंतर्जाल पर एकछत्र राज्य की
कोशिश ने कुछ लोगों को अंधा बना दिया
अपने दोस्त लेखकों की भीड़ जुटाकर
सम्मान की एक दुकान को सजा दिया
एक लेखकनुमा ब्लोगर जो
लिख नहीं पाता था कविता
पसंद भी नहीं था पढ़ना
चुन लाया कहीं से तीन सर्वश्रेष्ठ
और अपना फैसला सुना दिया
कवियों के ब्लोग दूर ही रखे गए
तकनीकी [...]

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सपने सिर्फ सपने होते-हिन्दी साहित्य कविता

सपने में जब खोये रह्ते
कभी पूरी होंगे यही सोचकर
बहुत कुछ सहते
जब होता है हकीकतों की तपिश से सामना
तब सबके जिस्म जलने लगते
पूरे भी हो जाएं तो भी
सपने वैसे ही नहीं लगते
जिन्हें पालते-पोसते हैं बडे चाव से दिल में
कभी भी वह सपने सच होकर भी
अपनी नहीं लगते
हकीकतों से कब तक मुहँ [...]

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