Monthly Archives: मई, 2011

प्रजा का शोषण करने से राजा की शक्ति क्षीण होती हैं-हिन्दू धार्मिक विचार

      शरीरकर्षणात्प्राणाः क्षीयन्ते प्राणिनां यथा। तथा राज्ञामपि प्राणाः क्षीयन्ते राष्ट्रकर्षणात्।।           “जिस प्रकार शरीर को भोजन पानी न देकर उसका शोषण करने से उसकी प्राणशक्ति कमजोर हो जाती है उसी तरह राष्ट्र या प्रजा का शोषण करने से राजा की प्राणशक्ति कमजोर हो जाती है।”                       जिन लोगों ने मनुस्मृति को नारी तथा निम्न जातियों [...]

गृहलक्ष्मी से बड़ा सामान-हिन्दी हास्य कविता (grihalakshmi ka bada saman-hindi hasya kavita

रिश्ते की बात करते हुए वर पक्ष ने जमकर डींग मारीं ‘हमारे पास अपना आलीशान मकान है, अपनी बहुत बड़ी दुकान है, घर में रंगीन टीवी, फ्रिज,ऎसी और कपडे धोने की मशीन है रसोई में बनते तमाम पकवान हैं’. फिर रिश्ता तय होते ही अपनी मांगों की सूची कन्या पक्ष को थमा दीं जिसमें तमाम [...]

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