Monthly Archives: अप्रैल, 2011

हिन्दी शायरी-ताज और दौलत (hindi shayari-taj aur daulat)

जिनको पहनाया ताज़ वही दौलत के गुलाम हो गये, जिन ठिकानों पर यकीन रखा वही बेवफाई की दुकान हो गये। किसे ठहरायें अपनी बेहाली का जिम्मेदार दूसरों की कारिस्तानियों से मिली जिंदगी में ऐसी हार कि अपनी ही सोच पर ढेर सारे शक और मुंह से निकलते नहीं लफ्ज़ जैसे कि हम बेजुबान हो गये। [...]

क्रोध को सामदंड से शांत करें-मनु स्मृति

अपमानातु सम्भूतं मानेन प्रशमं नयेत्। सामपूर्व उपायो वा प्रणामो वाभिमानजे।।           हिन्दी में भावार्थ-जब अपने अपमान से विग्रह यानि तनाव सामने आये तब सम्मान देकर उसे शांत करें और जब अभिमान से उत्पन्न हो तब सामपूर्वक उसका उपाय कर शांत करें। कुर्यायर्थदपरित्यागमेकार्थाभिनिवेशजे। धनापचारजाते तन्निरोधं न समाचरेत्।।           हिन्दी में भावार्थ-जब एक ही प्रयोजन के कारण [...]

प्रथ्वी पर विचरते हैं तीन हीरे-हिन्दी धार्मिक चित्तन (prathvi ke teen heere-hindi dharmik chittan)

           आधुनिक प्रचार माध्यमों के विज्ञापनों से पूरा भारतीय समाज दिग्भ्रमित हो रहा है। क्रिकेट खिलाड़ियों, फिल्म अभिनेता तथा अभिनेत्रियों के अभिनीत विज्ञापन उपभोग की ऐसी खतरनाक प्रवृत्ति को जाग्रत करते हैं कि लोगों की अध्यात्मिक चेतना लुप्त हो गयी है। फिर हमारी शिक्षा व्यवस्था में ऐसी प्रणाली अपनाई गयी है जो केवल गुलाम बनाती [...]

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