Monthly Archives: अप्रैल, 2010

खामोश तूफान-हिन्दी शायरी (khamosh toofan-hindi shayari)

दीवार के उस तरफ वह आग की तरह उफन रहे हैं यह सोचकर कि इस पार पहुंचते ही तिनके को जला डालेंगे। अंदाज नहीं उनको इस बात का कि यहां भी कोई खामोश तूफान सांस ले रहा है यह ख्याल करते हुए कि हवाओं का रुख पलटा है कई बार इस बार आग को भी [...]

हिन्दू धर्म दर्शन-पति पत्नी में झगड़ा न करायें

मद्यपापनं कलहं पुगवैरं भार्यापत्योरंतरं ज्ञातिभेदम्। राजद्विष्टं स्त्रीपुंसयोर्विवादं वज्र्यान्याहुवैश्चं पन्थाः प्रदुष्टः।। हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद विदुर कहते हैं कि शराब पीना, कलह करना, अपने समूह के साथ शत्रुता, पति पत्नी और परिवार में भेद उत्पन्न करना, राजा के साथ क्लेश करने तथा किसी स्त्री पुरुष में झगड़ा करने सहित सभी बुरे रास्तों का त्याग करना ही श्रेयस्कर  है। [...]

हिन्दू धर्म संदेश-नीच स्वभाव होने पर ऊंचे कुल का सम्मान नहीं मिलता

य ईर्षुः परवित्तेषु रूपे वीर्य कुलान्वये। सुखभौभाग्यसत्कारे तस्य व्याधिनन्तकः।। हिंदी में भावार्थ-जो दूसरे का धन, सौंदर्य, शक्ति और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है। न कुलं वृत्तही प्रमाणमिति मे मतिः। अन्तेध्वपि हि जातानां वृत्तमेव विशिष्यते।। हिंदी में भावार्थ-अगर प्रवृत्ति नीच हो तो ऊंचे कुल का प्रमाण भी सम्मान नहीं [...]

चाणक्य दर्शन-पैसा जोड़ने से ही शांति नहीं मिलती

धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु चाहारकर्मसु। अतृप्तः प्राणिनः सर्वे याता यास्यन्ति यान्ति च।। हिन्दी में भावार्थ- धन और भोजन के सेवन तथा स्त्री के विषयों में लिप्त रहकर भी अनेक मनुष्य अतृप्त रह गए, रह जाते हैं और रह जायेंगे। किं तया क्रियते लक्ष्म्या या वधूरिव केवला। या तु वेश्येव सा मान्या पथिकैरपि भुज्यते।। हिन्दी में भावार्थ-उस [...]

ईर्ष्या जैसी व्याधि की कोई दवा नहीं

य ईर्षुः परवित्तेषु रूपे वीर्य कुलान्वये। सुखभौभाग्यसत्कारे तस्य व्याधिनन्तकः।। हिंदी में भावार्थ-जो दूसरे का धन, सौंदर्य, शक्ति और प्रतिष्ठा से ईर्ष्या करता है उसकी व्याधि की कोई औषधि नहीं है। न कुलं वृत्तही प्रमाणमिति मे मतिः। अन्तेध्वपि हि जातानां वृत्तमेव विशिष्यते।। हिंदी में भावार्थ-अगर प्रवृत्ति नीच हो तो ऊंचे कुल का प्रमाण भी सम्मान नहीं [...]

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