Monthly Archives: फ़रवरी, 2010

तोहफों के जाल में प्यार-हिन्दी व्यंग्य कविता (love and gift-hinci satire poem)

अब प्यार जताने का सिलसिला तोहफों से चलने लगा है, इसलिये आदमी तोहफे देकर हर इंसान प्यार खरीदने लगा है। तोहफों की कीमत जितनी बढ़ेगी, प्यार की ऊंचाई भी उतनी लगेगी, नजरों का दोष है कि दिल का प्यार जाहिर करने की ख्वाहिशों के आगे हर तोहफा सस्ता लगने लगा है, मगर मजबूरी है बिना [...]

चाणक्य नीति शास्त्र-हृदय में शुद्धता में निहित है धर्म का भाव

वाचः शौचं च मनसः शौचन्द्रियनिग्रहः। सर्वभूति दया शौचं एतच्छौत्रं पराऽर्थिनाम्।। हिंदी में भावार्थ-वाणी की पवित्रता, मन की स्वच्छता, इंन्द्रियों पर नियंत्रण, समस्त जीवों पर दया और भौतिक साधनों की शुद्धता ही वास्तव में धर्म है। पुष्पे गंधं तिले तैलं काष्ठेऽग्निं पयसि घृतम्।। इक्षौ गुडं तथा देहे पश्चाऽऽत्मानं विवेकतः।। हिंदी में भावार्थ-पुष्पों में सुंगध, तिल में [...]

रहीम दर्शन-भक्ति न करने पर विषय घेर लेते हैं

कविवर रहीम कहते है कि —————– रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय भगवान राम को हृदय में धारण करने की बजाय लोग भोग और विलास में डूबे रहते है। पहले तो अपनी जीभ के स्वाद के लिए जानवरों की टांग खाते हैं और फिर उनको [...]

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