Posted by: दीपक भारतदीप | May 12, 2009

संत कबीर वाणीः अच्छा खाने को मिले तो भी बेवकूफ की संगत न करें

कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय
खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय

संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु की संगत में अगर भूसी भी मिलै तो वह भी श्रेयस्कर है। खीर तथा तमाम तरह के व्यंजन मिलने की संभावना हो तब भी दुष्ट व्यक्ति की संगत न करें।

कबीर संगत साधु की, कभी न निष्फल जाय
जो पै बोवै भूनिके, फूलै फलै अघाय

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि साधुओं की संगति कभी भी व्यर्थ नहीं जाती और उसका समय पर अवश्य लाभ मिलता है। जैसे बीज भूनकर भी बौऐं तो तो खेती लहलहाती है।

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संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप

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