Posted by: दीपक भारतदीप | July 20, 2008

देखें यह चालाकी है या चोरी या कोई प्रयोग-आलेख

दीपक बापू कहिन पर अपना पाठ रखा और उस ब्लाग पर गया -जहां मेरे पाठ की कापी मेरे से पूछे ही रखी जा रही है-तो क्या देखता हूं कि पहले वाला पाठ उसने नहीं रखा पर आज वाला पाठ वहां पर आ गया। इतना तो समझ में आ गया है कि मेरे ब्लाग सीधे उस वेबसाइट/ब्लाग पर कैसे पहुंच रहे हैं। अब केवल यह जानना बाकी है कि वह इस देश का हिंदी ब्लागर है जो नये प्रयोग कर रहा है या कोई अंग्रेजी का ब्लागर है। इसकी संभावना भी हो सकती है कि वर्डप्रेस से जुड़ा कोई वह ब्लाग भी हो कि जो विभिन्न श्रेणियों के ब्लाग को अलग अलग करने की दृष्टि से बनाया गया हो। वह कोई ऐसा अंग्रेजी ब्लागर भी हो सकता है जो केवल साफ्टवेयर के सहारे अपना ब्लाग चला रहा हो और इस देश का भी।

इन संभावनाओं की तलाश करते हुए यह पोस्ट मैं लिख रहा हूं। शायद मैं ऐसा नहीं करता अगर दीपक बापू कहिन पर एक नया पाठ रखने चिट्ठाकार समूह को ईमेल करने के तत्काल उसके ब्लाग पर मुझे अंग्रेजी के बहुत सारे नये पाठ नहीं दिखाई देते। क्या वह उन संदेशों को कहीं पढ़ रहा था। मैंने उससे कहा था कि दोपहर तक वह मेरे पाठ हटा दे और उसने ऐसा करने की बजाय बहुत सारे अंग्रेजी के पाठ ही डाल दिये और गुमराह कर रहा है कि यह तो किसी अंग्रेज का ब्लाग है। इतना तय है कि अगर वह भारत के हिंदी ब्लाग जगत का सदस्य है तो बहुत पुराना है क्योंकि उसे इन चर्चाओं के बारे में पता चल जाता है। अगर वह अंग्रेज ब्लागर है तो फिर उसने मेरे तीन ब्लाग की कापी करने के बाद फिर किसी अन्य ब्लाग के पाठ को वहां क्यों नहीं रखा था। मेरे पाठ लगतार दो दिन तक क्यों दिखाई दे रहे थे?
क्या इस बीच में वहां कोई ऐसा पाठ नहीं आया था। बहरहाल उसने मेरे पाठ को खींचने वाले जो तार वहां लगा रखे हैं उनको हटाते हुए यह पोस्ट मैं लिख रहा हूं। देखते हैं अगर उसके बाद भी यह ब्लाग वहां पहुंचता है तो फिर आगे मामला बढ़ायेंगे और नहीं तो उस ब्लाग पर निगाह रखना होगी कहीं वह कोई और कारिस्तानी तो नहीं कर रहा है। वैसे यह अंतर्जाल है पता नहीं पड़ता है कि हमें कोई धोखा दे रहा है या स्वयं ही खा रहे हैं। मैं इधर उधर जब सफल नहीं होता तो अपने लिखने में ही प्रयोग करता हूं।


दीपक भारतदीप
लेखक एवं संपादक


Responses

  1. हद..है …लोग चोरी के साथ-साथ सीना जोरी भी कर रहे हैँ……


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