** दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका** Mastram Deepak Bharatdeep's Hindi express patrika

July 3, 2008

संत कबीर वाणी:विषयी लोग दीप और संत हीरे समान होते हैं


दीपक सुन्दर देखि करि, जरि जरि मरे पतंग
बड़ी लहर जो विषय की, जरत न मोरे अंग

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं जलते हुए दीपक की रौशनी को देखकर पतंगे जल-जल कर मर जाते हैं। उसी प्रकार जब मनुष्य के मन में विषयों की लहर हमेशा उठती है और वह उसमें बहता रहता है-उसे अपने जीवन मरण का विचार ही नहीं रहता।

सहकामी दीपक दसा, सौंखें तेल निवास
कबीर हीरा संत जन, सहजै सदा प्रकाश

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जिसमें कामवासना अधिक होती है उसकी दशा दीपक के समान होती है जो जलते हुए अपने तेल को भी चूस लेता है जबकि वह उसकी ऊजा का स्त्रोत होता है और उसके समाप्त होने पर दीपक स्वयं भी बुझ जाता है। इसके विपरीत संत लोग हीरे के समान होते हैं जिनकी तपस्या का प्रकाश चारों और फैलता है।

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