Archive for June, 2008
रहीम के दोहे:शरीर रुपी बाजार में मन बिक गया
Posted by: दीपक भारतदीप on June 30, 2008
रहीम के दोहे:अपने मन की वेदना सबके सामने मत प्रगट करो
Posted by: दीपक भारतदीप on June 29, 2008
संत कबीर वाणी:टोना-टोटका सब झूठ है
Posted by: दीपक भारतदीप on June 28, 2008
संत कबीर वाणी:प्रपंची गुरूओं से कोई लाभ नहीं
Posted by: दीपक भारतदीप on June 27, 2008
चाणक्य नीति:शास्त्रों की निंदा करने वाले अल्पज्ञानी
Posted by: दीपक भारतदीप on June 22, 2008
भृतहरि शतक:नौकर का धर्म निभाना होता है कठिन
Posted by: दीपक भारतदीप on June 20, 2008
समाज के साथ होने का भ्रम पालना व्यर्थ-चिंतन
Posted by: दीपक भारतदीप on June 7, 2008