** दीपक भारतदीप की अमृत संदेश-पत्रिका** Mastram Deepak Bharatdeep's Hindi express patrika

April 30, 2008

क्रिकेट मैच में एक्शन का सीन-हास्य कविता

बगल में अखबार दबाकर
घर आया फंदेबाज और बोला
‘दीपक बापु तुमने
पहले अखबारों  और अब ब्लाग पर
क्रिकेट पर ही लिखना शुरू किया
फिर क्यों अब मूंह फेर लिया
देखो क्रिकेट में फिल्म के एक्शन का
मजा भी आ रहा है
पहले पिटा  हीरो
अब पीटकर बाहर जा रहा है
क्यों नहीं तुम भी देखा करते
बैट-बाल के खेल में
मारधाड़ की भी मजा क्यों नहीं लिया करते
ऐसे क्रिकेट से क्यों किनारा किया’

सुनकर पहले हैरान हुए फिर बोले
‘‘हम फिल्म के वक्त फिल्म और
क्रिकेट के वक्त क्रिकेट देख करते हैं
यह टू-इन-वन मजा तुम ही लो
हमें तो अब इससे दूर ही समझ लो
हमने पहले भी कहा था
क्रिकेट अब कम खेली जायेगी
पर उससे पहले उसकी पटकथा लिखा जायेगी
फिल्म वालों ने लिया है मोर्चा
क्रिकेट को चमकान का
तो उनकी कला यहां भी नजर आयेगी
आस्ट्रेलिया में किया था जिसने हीरो को रोल
उसे अब विलेन बनाकर पेश किया
उस समय के विलेन को दे रहे थें जो गालियां
अब बजा रहे उनके लिये तालियां
यह हीरो-हीरोइन भला कब  डायरेक्टर के
 हुक्म के बिना एक्शन के कब होते है
जरूर लिखी होगी किसे ने पटकथा
जो झगड़े की फोटो कैमरे से लेने में रोकते हैं
झगड़ा करने वाले खिलाड़ी
बाद में ऐसे होकर मिलते हैं
जैसे कोई बढि़या अभिनय किया
कह तो रहे है सभी
पर किसने देखा यह कि 
थप्पड़ मारने वाले ने अपना कितना नुक्सान किया
हमने ने देखा न मैच न झगड़ा
पर एक बात मानते हैं कि
क्रिकेट खेल में एक्शन का सीन लिखकर
पटकथा लिखने वाले ने कमाल किया
……………………….


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